बदायूं कांड के बाद महिला अपराधों पर प्रदेश सरकार ने तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन आगरा पुलिस का ढर्रा नहीं बदला है। मनमाफिक तहरीर लिखवाकर रिपोर्ट दर्ज करने वाली थाना बसई जगनेर की पुलिस ने किशोरी को 18 अगस्त की घटना के तीन दिन बाद गुरुवार को मेडिकल कराने के लिए आगरा भेजा। वहीं गुरुवार को छेड़खानी का शिकार हुई चचेरी बहन को मेडिकल कराने की जगह पुलिस ने घर भेज दिया।
कहीं परिवार पलायन तो नहीं कर गया
परिवार के लोगों के अनुसार वह किशोरी का मेडिकल कराने के लिए आगरा गए। लेकिन देर शाम तक नहीं लौटे। फोन पर बात की तो बताया कि वह आगरा में ही हैं। कब लौटेंगे, जानकारी नहीं दी। इधर, बताया जा रहा है कि आरोपी पास के ही एक गांव में शरण लिए हुए हैं। परिवारवालों ने आशंका जाहिर की है कि आरोपियों की दहशत के चलते पीड़ित किशोरी सहित माता-पिता गांव से पलायन न कर गए हों।
उठे सवाल
क्या इस तरह के मामलों में पीड़ित किशोरी को तीन दिन तक मेडिकल के लिए नहीं भेजने से साक्ष्य नष्ट नहीं होंगे?
आखिर पीड़ित किशोरी को मेडिकल के लिए शिकायत करने वाले दिन क्यों नहीं भेजा गया?
पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों से साठगांठ कर ली है। आरोपी गांव में घूम रहे हैं। पुलिस ने गिरफ्तार करने की कोशिश क्यों नहीं की?
परिवार की दूसरी पीड़ित किशोरी को भी मेडिकल कराने की जगह गुरुवार को घर क्यों भेजा। आज ही मेडिकल क्यों नहीं कराया गया?
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
थाने में पुलिस के मनमाफिक तहरीर लिखवाने और पीड़ित किशोरी को तीन दिन बाद मेडिकल के लिए भेजने के मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। सीओ खुद गांव में जाकर जांच करके अपनी रिपोर्ट देंगे।
- शलभ माथुर, एसएसपी
‘गाम में एसौ तो कबऊ न भयौ’
आगरा। एक ही परिवार की दो बहनों की आबरू पर हमले के बाद से ग्रामीणों में काफी रोष है। गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। पेड़ की छांव में बैठे ग्रामीण इस घटना को गांव पर धब्बा मान रहे हैं। आरोपियों के घर के आस-पड़ोस में रहने वालीं कुछ महिलाओं का कहना है कि ‘गाम में एसौ तो कबऊ न भयौ, जाने तो गाम को नाम ही खराब कर दियौ।’