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झांसी के एक घर में कैद था अपहृत सोनू

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आगरा। मलपुरा के गांव नानपुर से अगवा पीडब्ल्यूडीकर्मी के पुत्र भानुप्रताप उर्फ सोनू को पुलिस टीमों ने झांसी के सीपरी बाजार से मुक्त करा लिया। तीन अपहर्ताओं को भी दबोचा है। सोनू का अपहरण एमपी के डकैत सरदार गुर्जर ने किया था। पांच करोड़ की फिरौती मांगी जा रही थी। पुलिस सरदार की तलाश कर रही है।
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एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि नानपुरा के पोहप सिंह पीडब्ल्यूडी में कार्यरत हैं। चार अगस्त को बोदला स्थित एक कोचिंग से उनका पुत्र दोपहर एक बजे घर लौटा। तभी जायलो कार से आए तीन लोग सोनू को घर से बाहर बुलाकर बातचीत करने लगे। उसे कार में डालकर अगवा कर लिया। छात्र के अपहरण के बाद उसकी तलाश में क्राइम ब्रांच के साथ स्पेशल टीम लगाई गई। इसी बीच पांच करोड़ की फिरौती की डिमांड आई। बाद में फिरौती की रकम कम होती गई। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान पुलिस अपहर्ताओं की लोकेशन लेती रही।
शनिवार शाम को ग्वालियर रोड पर गांव बाद के पास फिरौैती की रकम देना तय हुआ। यहां पुलिस ने घेराबंदी कर गांव लकारा, सीपरी बाजार, झांसी निवासी देशराज सिंह, इसी गांव के वीरपाल सिंह और गांव बनहरी, ग्वालियर के हरी सिंह उर्फ छोटू को गिरफ्तार कर लिया। तमंचे और कारतूस बरामद किए। तीनों अपहर्ताओं ने बताया कि सोनू मध्य प्रदेश के दस्यु सरदार सिंह गुर्जर के गैंग की कैद में है। पुलिस टीमों ने अपहर्ताओं की निशानदेही पर सोनू को झांसी के गांव रोनिजा में मन्नूपाल के घर से मुक्त करा लिया। टीमों में मुख्य रूप से क्राइम ब्रांच प्रभारी अजय किशोर, सीओ अछनेरा अखिलेश भदौरिया, एसओ विनयप्रकाश, सर्विलांस प्रभारी छोटेलाल शामिल रहे।
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अपहरण उद्योग चला रहा सरदार
एसएसपी ने बताया कि दस्यु सरदार सिंह गुर्जर सीपरी बाजार, झांसी का रहने वाला है। सरदार सिंह के खिलाफ सीपरी बाजार थाने में लूट, हत्या, डकैती, अपहरण के 50 से अधिक मामले दर्ज हैं। अदालत ने आजीवन कारावास की सजा दी थी। दो साल पहले वह पेशी के दौरान पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया। उस पर मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश शासन ने 50 हजार का इनाम घोषित किया है। वह लकारा के घने जंगलों में रहकर अपहरण उद्योग चला रहा है। सरदार सिंह ने इसी माह हमीरपुर के एक व्यवसायी का अपहरण करके 35 लाख रुपये की फिरौती वसूली थी। इसी तरह तीन माह पहले भी उसने रेलवे के इंजीनियर का अपहरण किया था।
दिनभर में एक रोटी-अचार
सोनू ने बताया कि पांच लोग उसकी निगरानी करते थे। मारपीट करते थे। पिता को फोन कराने पर रोने के लिए दबाव डालते थे। वे लोग दिनभर में एक रोटी और आचार का टुकड़ा खाने को देते थे। कई दफा पिता को धमकाया था कि बेटे को खत्म कर देंगे।
फिरौती देकर छूटने की चर्चा
चर्चा ये भी है कि अपहृत सोनू को मोटी फिरौती देकर मुक्त कराया गया है। हालांकि पुलिस ने इससे इनकार किया है। लेकिन डकैत के गढ़ से छात्र को सकुशल मुक्त कराकर ले आने की पुलिस की बात पर लोगों को यकीन नहीं हो रहा है।
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