आगरा। गुरु का ताल के बाद सिकंदरा पर बन रहा रेलवे ओवर ब्रिज भी समस्याओं की बाढ़ लाएगा। आरओबी के शुरू होते ही यहां से गुजरने वाला ट्रैफिक सीधे हाईवे पर उतरेगा। अकबर टॉम्ब पर बने टी प्वाइंट से यात्री दिल्ली-मथुरा हाईवे और कानपुर की ओर मुड़ेंगे। गुरु के ताल आरओबी की तरह हाईवे से आने वाले वाहनों की भिड़ंत आरओबी के वाहनों से होगी और अकबर टॉम्ब टी प्वाइंट दुर्घटना प्रभावित जोन बन जाएगा।
लगभग दो साल पूर्व 15 सितंबर 2011 में सिकंदरा आरओबी का निर्माण शुरू हुआ था। दिसंबर 2013 में निर्माण पूरा होना है। लेकिन अभी तक पचास प्रतिशत काम ही हो पाया है। निर्माण के दौरान क्षेत्र का व्यापार लगभग चौपट हो गया है। सड़कों जर्जर हो गई हैं। दुर्घटना जोन भले ही बाद में बने, लेकिन सिकंदरा का यह इलाका नरक क्षेत्र बन गया है।
37 करोड़ रुपये से होगा तैयार
आरओबी निर्माण पर 36.39 करोड़ रुपये खर्च होंगे। लगभग सात करोड़ रुपये सेतु निगम खर्च करेगा, जबकि 10.11 करोड़ रेलवे। अधिकारियों के अनुसार यह राशि केवल आरओबी निर्माण के लिए है। ऐसे में एप्रोच रोड या लिंक रोड का कार्य सेेतु निगम नहीं करेगा।
अभी भी जान जोखिम में
आरओबी निर्माण के कारण रेलवे ने सिंकदरा होते हुए बोदला की ओर जाने वाले फाटक को बंद कर दिया है। अभी तक लोग रेलवे लाइन को पैदल पार कर लेते थे, लेकिन गुरुवार को चेन बांधकर रास्ते को बंद कर दिया गया है। इसके बाद भी लोग चेन फांदकर निकल रहे हैं।
वर्जन
सेतु निगम यहां पर भी सिर्फ पुल का निर्माण कर रहा है। एप्रोच रोड बनाने की जिम्मेदारी एनएच की होगी। ट्र्रैफिक नियंत्रण के लिए क्या व्यवस्था की जाती है, यह जिम्मेदारी सेतु निगम की नहीं है।
- एनआर वर्मा, प्रभारी सिकंदरा ओवर ब्रिज
सड़क हो गई जर्जर
आरओबी के निर्माण ने जीना मुहाल कर दिया है। सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई है। इस पर पैदल चलना मुश्किल हो रहा है। व्यापार भी चौपट हो रहा है।
- सोमेश गुप्ता, व्यापारी
आरओबी की नहीं थी जरूरत
सिकंदरा पर आरओबी के निर्माण की जरूरत ही नहीं है। क्योंकि दो किलोमीटर पहले ही गुरु के ताल पर और लगभग दो किमी आगे शास्त्रीपुरम आरओबी बने हुए हैं। ऐसे में केवल पैसे की बर्बादी की जा रही है।
- विनय कुमार, मेडिकल स्टोर संचालक