बाह/पिनाहट। चंबर सेंचुरी के पिनाहट घाट के पक्के पुल निर्माण की एनओसी मिलने के बाद अंबाह-पिनाहट मार्ग के निर्माण का पेंच फंस गया है। पश्चिमी यूपी के मुख्य वन संरक्षक डा. एसपी श्रीवास्तव ने बुधवार को पिनाहट पहुंचकर नक्शे का भौतिक सत्यापन किया। चंबल किनारे की कुछ जमीन ऐसी है जिस पर मध्यप्रदेश और यूपी के अधिकारियों में स्वामित्व को लेकर विवाद पैदा हो गया है। वहीं इटावा के वार्डन के साथ मुख्य वन संरक्षक ने चंबल सेंचुरी में घड़ियाल, मगरमच्छ और विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के घाेंसलों को देखा।
29.89 करोड़ की लागत से मध्यप्रदेश और यूपी के बीच पिनाहट में चंबल नदी पर बनने वाले पक्के पुल की एनओसी के बाद भी मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। 1989 से सियासत की भेंट चढ़े पुल को जोड़ने वाली पिनाहट-अंबाह की सड़क की एनओसी का पेच फंसता दिख रहा है। मध्यप्रदेश वन विभाग ने रेवेन्यू का जो नक्शा एनओसी के लिए भेजा है, उसे लेकर पश्चिमी यूपी के मुख्य वन संरक्षक डॉ. एसपी श्रीवास्तव को मौके पर भिन्न स्थिति देखने को मिली। फिलहाल पुल के साथ सड़क की राह आसान नहीं है। मुख्य वन संरक्षक ने इटावा के वार्डन गुरुमीत सिंह, रेंजर बाह नवलकिशोर सेंचुरी में मगरमच्छों, घड़ियालों को देखा। रिवर्टन, लेगविन, थिकनी आदि चिड़ियां नेस्टों की भी जांच की।
= अंबाह-पिनाहट मार्ग के नक्शे को लेकर गलत तथ्य सामने आए हैं। स्थलीय निरीक्षण के बाद ही आपत्तियों से मुख्य वन संरक्षक अपनी रिपोर्ट भेजकर मध्यप्रदेश के अधिकारियों को अवगत कराएंगे।
- नवल किशोर, रेंजर वन्य जीव