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माफ कीजिए! मेरा दिल धुकधुका रहा है

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आगरा। जीवन के झंझावतों के बीच प्रेम और हास्य का भी अपना स्थान है। मानव मन की इन्हीं उलझी गुत्थियों को दमदार कथानक के जरिये सूरसदन में मंगलवार को भारतीय जन नाट्य संघ द्वारा नाटक ‘अरे, आप’ के जरिये दिखाया गया।
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राजेन्द्र रघुवंशी की दसवीं पुण्यतिथि पर रूसी लेखक अन्तोन चेखव की दो एकांकियों को ‘शादी का प्रस्ताव (प्रपोजल)’ और ‘गंवार (बियर)’ को ‘अरे, आप’ में पेश किया गया।
पड़ोस में रहने वाला एक युवक बूढ़े बाप से उसकी विधवा बेटी का हाथ मांगता है। युवक युवती से बातचीत में अपनी जमीन और कुत्ते और घोड़े जैसे पालतू जानवरों की उसके जानवरों से तुलना करके लड़ता है। विवाद इतना बढ़ता है कि रिश्ता जुड़ने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच जाता है। इस पर पड़ोसी युवक माफ कीजिए! मेरा दिल धुकधुका रहा है कहते हुए मरने का नाटक करता है तो बूढ़ा बाप शादी के लिये हां कर देता है। दूसरे दृश्य में युवक की मौत पर कर्जे लेने के लिए जमीदार युवती के घर पहुंचता है। यहां उनमें मरने-मारने तक की नौबत आ जाती है। युवती की दिलेरी पर जमींदार शादी का प्रस्ताव रखता है जिसे वह स्वीकार कर लेती है। नाटक में नीतू दीक्षित, आशुतोष गौतम, अर्जुन कुमार गिरि, विक्रम सिंह, निर्मल सिंह का अभिनय सराहनीय रहा। जितेन्द्र रघुवंशी और पंकज मालवीय द्वारा तैयार नाटक का निर्देशन दिलीप रघुवंशी ने किया। मानस रघुवंशी, सिद्धार्थ रघुवंशी, आमिर खान, नवीन शिवहरे, अलका धाकड़, भुवनेश धाकड़, रक्षा गोयल, नव्या अग्निहोत्री तथा शुभम सिंह का काम भी प्रशंसनीय रहा। इस दौरान सरोज गौरिहार, डा. आरसी शर्मा, डा. एसके दुबे, एमपी दीक्षित आदि उपस्थित रहे।
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