बाह। देश के आतंकी कसाब को पहले ही फांसी देनी चाहिए थी। उसकी फांसी की खबर मिलते ही चौतरफा खुशी का माहौल देखा गया। बाह कसबे तथा गांव देहात में कहीं मिष्ठान बांटकर खुशी का इजहार किया गया तो कहीं आतिशबाजी चलाई गई।
आतंकवादी अजमल कसाब को फांसी दिए जाने पर जनता इंटर कालेज जैतपुरकलां के पूर्व प्रवक्ता सीताराम शर्मा ने कहा कि फांसी बहुत पहले ही दे देनी चाहिए थी। यह सरकार का देर से उठाया गया कदम है। बाह के गोपाल कृष्ण तिवारी ने सरकार के कदम को सराहनीय बताया। एनडी जैन स्कूल बाह के प्रबंधक विनोद जैन ने कहा कि उसे बहुत पहले फांसी दे दी जाती तो जनता में गलत संदेश नहीं जाता। टीचर्स कालोनी के रामरतन शर्मा ने फांसी को आतंकवादियों के लिए सबक बताया। भदावर महाविद्यालय की पूर्व प्रवक्ता डा. अरुणा भदौरिया ने कहा कि कसाब की फांसी शहीदों के लिए श्रद्धांजलि से कम नहीं है। उन्होंने इसमें देरी के लिए केंद्रीय सरकार की आलोचना भी की। एआर आदर्श इंटर कालेज के प्रवक्ता श्याम सिंह राठौर ने इसे कांग्रेस सरकार की पहली उपलब्धि बताया। वहीं बाह के पप्पू अंसारी ने कहा कि देश के सम्मान को चोट पहुंचाने वाले के साथ ऐसा ही सलूक करना चाहिए।
वीरांगनाओं की आंखों में खुशी के आंसू
बाह। 31 जुलाई 2000 को आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए दिनेश भदौरिया की पत्नी राधादेवी ने कसाब की फांसी पर चेन की सांस ली है। उन्होंने कहा कि सरकार को आतंकवाद के खिलाफ कठोर कदम उठाने होंगे। वहीं 1971 में अपने पति को खोने वाली जैतपुर के क्यारी निवासी शांतिदेवी को जब इसकी जानकारी हुई तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े। शहीद इंद्रजीत की पत्नी स्नेह कुमारी ने कहा कि यह सलूक हर आतंकी के साथ किया जाए। जैतपुर के पुरा चौधरान निवासी फुल्हानी देवी भी सरकार के इस फैसले से बेहद खुश हैं।