एटा। अंधाधुंध दोहन से धरती की कोख सूखती जा रही है। भूगर्भ से जल का भंडार खत्म हो चला है। आलम यह है कि जिले के भूगर्भ जल स्तर का 88 फीसदी से अधिक दोहन हुआ है। जिले के आठ में से दो ब्लॉक क्रिटिकल जोन में हैं। यदि अभी भी वर्षा जल के संग्रहण के उपायों पर गौर नहीं किया गया, तो भावी पीढ़ी के लिए भूगर्भ जल बस सपना बनकर रह जाएगा।
विगत वर्षों में बेइंतहा भूजल दोहन के चलते सभी ब्लॉकों में जलस्तर गिर गया है। बारिश कम होने से भूगर्भ जल की स्थिति का संतुलन बिगड़ गया है। यूं तो पानी का उपयोग साल भर होता है और बरसात बमुश्किल तीन-चार महीनों की ही होती है। इसके बावजूद अच्छी बारिश काफी हद तक भूजल के भंडार को भर देती है। साल 2014 से औसत बारिश आधे पर आकर टिक गई है और जमकर हो रहे धरती के दोहन ने भूगर्भ जल का हाल बिगाड़ दिया है। भूगर्भ जल विभाग के आंकड़ों की मानें तो जिले में भूगर्भ जल का दोहन 88.29 फीसदी तक हुआ है। सबसे ज्यादा खराब हालात निधौलीकलां और जलेसर विकास खंड में है। यहां जलस्तर 11 मीटर तक गिर चुका है। वहीं मारहरा ब्लॉक क्रिटिकल स्थिति में है। ऐसे में भूगर्भ का गिरता स्तर चिंता की बात है। यदि अभी इस बारे में नहीं सोचा गया तो भविष्य में बुरे परिणाम होंगे।
औसत भूजल (मीटर में)
क्षेत्र 2015 2016 2017
एटा सिटी 8.07 8.08 8.10
जैथरा 6.64 7.03 7.08
जलेसर 08.08 09.50 11.00
मारहरा 8.17 09.15 10.75
निधौली कलां 9.06 10.09 11.01
शीतलपुर 7.26 8.15 8.30
अवागढ़ 8.07 8.08 10.01
सकीट 6.00 6.97 7.01
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इन कारणों से गिरा भूजल स्तर
- बोरिंग
- पक्के रास्तों का निर्माण
- पेड़ों का अंधाधुंध कटान
- जल को व्यर्थ बहाना
- बारिश का कम मात्रा में होना
- वर्षा जल का संग्रहण नहीं होना
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इनका कहना है
जिले में भूगर्भ जल का स्तर गिरता जा रहा है। साल भर में यह दो मीटर तक खिसक जाता है। ऐसे में इस बार भी जल स्तर में गिरावट आएगी। इसको रोकने की कवायद चल रही है। एएस भाटी, अधिशासी अभियंता, जल निगम