फिरोजाबाद। कांच की रंग-बिरंगी चूड़ियां सुहाग का प्रतीक हैं। सुहागनगरी में बनने वाली कांच की चूड़ियों की पूरे देश में बिक्री होती है, लेकिन चूड़ी उद्योग महंगे कच्चे माल व गैस की मार से पिछड़ रहा है।
चूड़ी उद्योग सुहागनगरी का पारंपरिक उद्योग है। कांच की चूड़ियाें से फिरोजाबाद की देश-विदेश में पहचान है। सुहागनगरी में बनने वाली चूड़ियाें की अधिक डिमांड रहती है। आधुनिक युग में महिलाओं की पसंद भी बदल रही है। वह कांच की चूड़ियों के स्थान जरकिन, मैटल, लाख व प्लास्टिक के कड़ों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे कांच की चूड़ियों की डिमांड निरंतर घटती जा रही है।
कांच की चूड़ियों की डिमांड घटने का एक और प्रमुख कारण है कि यहां सालों से पुरानी तकनीक से ही चूड़ी बन रही हैं, जबकि चूड़ी उद्योग को नई तकनीक की बेहद जरूरत है। महंगी तकनीक होने के कारण उद्यमी केंद्र व प्रदेश सरकार से मदद की उम्मीद लगाए हुए हैं।
चूड़ी उद्योग में दूसरी बड़ी समस्या जीएसटी लगने के बाद कच्चे माल व गैस की रेट बढ़ना है। इससे चूड़ी उत्पादन महंगा हुआ है। उद्यमियों के सामने तमाम मुश्किलें आ रही हैं। ऐसी स्थिति में कांच चूड़ी उद्योग से जुड़े उद्यमी केंद्र सरकार से आस लगाए हुए हैं कि आम बजट में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सस्ती दर पर गैस व कच्चा माल उपलब्ध कराया जाए। नई तकनीकी को बढ़ावा जाए।