पुलिस महानिदेशक की पहल पर सोमवार से पुलिस ने नारी सुरक्षा सप्ताह शुरू कर दिया है। जबकि अपराध रोकने की बात तो दूर उनको समुचित न्याय देने में ही कोताही बरतती है। ऐसे एक नहीं कई मामले हैं जिनमें महिलाएं प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पुलिस के चक्कर लगाते थक गई।
जनपद में आधी आबादी के सामने अपनी सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती है। वे न तो राह चलते ही सुरक्षित हैं और न ही घर पर। अपराधिक मानसिकता वाले लोग उनको आसानी से अपना शिकार बना लेते हैं। नवविवाहिताएं दहेज के लालची मानसिकता के परिवारीजनों के हाथ खतरे में रहती हैं। उनकी हत्या कर दी जाती है।
जनपद में इस साल अब तक 18 महिलाएं दहेज हत्या का शिकार हो चुकी हैं। इनमें ससुरालीजनों ने कई महिलाओं को फांसी के फंदे पर लटकाकर मार डाला। नगर मेें एक नवविवाहिता को तो ससुरीलीजनों ने गोली मारकर हत्या कर दी। इस साल आठ महिलाओं की हत्या हुई। इनमें से तीन बालिकाओं को हत्या का शिकार बनाया गया।
इनमें से एक मासूम बालिका की दुष्कर्म के बाद हत्या की गई। ढोलना में तो मां बेटी की तो मात्र इस बात पर हत्या कर दी गई कि युवती के पिता ने युवक की अपनी पुत्री से दूर रहने के लिए पिटाई कर दी थी। गंजडुडवारा में पड़ोसी द्वारा घर के सामने बनाए जा रहे चबूतरे का विरोध करने पर महिला की गोली मारकर हत्या कर दी।
इसी तरह एक युवती को पड़ोसी ने जहर देकर मार डाला। सिढ़पुरा में खेल रही एक बालिका को अगवा कर ले जाने के बाद हत्या कर दी गई। सिढ़पुरा में ही एक अन्य मामले में मासूम भाई बहन की हत्या का मामला सुर्खियों में रहा। इस मामले का पुलिस अभी तक खुलासा नहीं कर पाई है। इस साल 23 महिलाओं या बालिकाओं से दुष्कर्म की घटनाएं हुई।
इनमें से सोरों में तहेरे भाई ने ही अपनी बहन के साथ दुष्कर्म किया। इनमें कई मामले सामूहिक दुष्कर्म के भी रहे। ढोलना में दुष्कर्म पीढ़िता किशोरी के साथ पुलिस की संवेदनहीनता सामने आई। पुलिस ने तीन दिन तक किशोरी व परिवारीजनों को थाने में बैठाए रखा।
मामला जब मीडिया की सुर्खियों में आया तब पुलिस ने मामला दर्ज किया। इतना ही नहीं प्रतिवर्ष ही 50-60 किशोरियों को भगा ले जाने के मामले भी पुलिस के रिकार्ड में दर्ज होते हैं। पुलिस इन मामलों में बरामदगी को गंभीरता नहीं दिखाती। यदा कदा ही ऐसेे मामलों का खुलासा हो पाता है।