फिरोजाबाद। कहने को नगर पालिका से नगर निगम बन गया। शहर में आज भी सबसे बड़ा मुद्दा पार्किंग है। नगर निगम द्वारा पार्किंग का स्थाई इंतजाम नहीं करने से पूरे शहर में जाम का झाम नजर आता है। वर्षों से जाम की समस्या अब गंभीर हो चली है। शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने पर निगम के अफसरों के साथ जनप्रतिनिधियों ने भी कभी गंभीरता नहीं दिखाई।
कांच की चूड़ियों के नाम से देश-विदेश में मशहूर फिरोजाबाद में हर कदम पर मिलने वाले जाम से शहर की छवि धूमिल हो रही है। शहर की सात लाख से अधिक आबादी है। यहां हजारों की संख्या में चार पहिया, तिपहिया, दुपहिया वाहन हैं। इसके बाद भी नगर निगम आजतक शहर में स्थाई पार्किंग का इंतजाम नहीं कर सका। शहर के प्रमुख सुभाष तिराहा, गांधीपार्क, स्टेशन रोड, सेंट्रल चौराहा, गंज चौराहा, सदर बाजार, घंटाघर, नालबंद चौराहा, रसूलपुर, जाटवपुरी, नगला बरी, कोटला चुंगी, जलेसर रोड हर चौराहे पर हर वक्त जाम का झाम नजर आता है।
शास्त्री मार्केट शहर का मुख्य बाजार है। बाजार में खरीदारी करने के लिए अधिकांश लोग वाहनों से पहुंचते हैं, लेकिन यहां भी पार्किंग का इंतजाम नहीं है। मार्केट के बीचोबीच दुकानों के आगे वाहन खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे पैदल राहगीरों का निकलना मुश्किल हो जाता है।
नगर निगम का दर्जा मिले तीन साल गुजर गए, परंतु नगर निगम पूरे शहर में कहीं स्थाई पार्किंग नहीं बनवाई। पार्किंग के नाम पर इतना अवश्य हुआ कि नगर निगम द्वारा शहर के संत कंपाउंड, जलेसर रोड क्लब चौराहा तथा कोटला चुंगी चौराहे पर लाखों रुपये में ठेके उठा दिए गए। ठेके के नाम पर नगर निगम अफसर ठेकेदारों से वसूली करा रहे हैं। चौराहों पर लगने वाले जाम से कोई सरोकार नहीं है।
पिछले दो-तीन साल में शहर में ई-रिक्शा की बाढ़ आ गई है। शहर के सुभाष तिराहे से लेकर अधिकांश चौराहों पर ई-रिक्शा चलते हैं। सुभाष तिराहा, गांधीपार्क, संत कंपाउंड, सेंट्रल चौराहे, नालबंद से रसूलपुर तक ई-रिक्शा की भरमार है। सैकड़ों की संख्या में ई-रिक्शा के संचालन से जाम की समस्या पहले से गंभीर हो गई है।