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48 लाख सालाना खर्च फिर भी साफ नहीं पानी

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15एमएनपी-07-ईशन नदी पुल पर बना सीवेज पंपिंग स्टेशन - फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। जल संरक्षण और स्वच्छता के उद्देश से जिले में वर्ष 2006 में सीवरेज प्रोजेक्ट की नींव रखी गई लेकिन शुरू होने के चार साल बाद ही करोड़ों की लागत से बने इस प्रोजेक्ट पर पानी फिर जाएगा। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को संचालित करने वाली कंपनी के भागने के बाद अब इसका संचालन किसी भी दिन बंद हो सकता है। इस संबंध में जल निगम ने विभागीय अधिकारियों को भी पत्र भेजा है।
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जिले में वर्ष 2006 में सीवर लाइन डालने और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण का काम शुरू हुआ था। 85 करोड़ रुपये की लागत से शहर में लाइन डाले जाने के साथ ही जल निगम कार्यालय में एसटीपी की स्थापना कराई गई। वर्ष 2012 में नगर पालिका को कार्य पूर्ण होने के बाद सीवर लाइन जहां हैंडओवर कर दी गई तो वहीं शासन ने एसटीपी के संचालन के लिए मुंबई की हाइड्रो एयर प्राइवेट लिमिटेड का चयन किया गया।
वर्ष 2016 में सीवर लाइन चालू हो गई। तब से लेकर अब तक इसी कंपनी द्वारा एसटीपी का संचालन कर सीवेज को शोधित किया जा रहा है लेकिन बीते वर्ष अगस्त 2019 में कंपनी काम छोड़कर चली गई। दरअसल कानपुर में एक काम को लेकर शासन ने इस कंपनी को काली सूची में डाल दिया था, इसके बाद ही मैनपुरी से भी कंपनी ने अपने कर्मचारी वापस बुला लिए। तब से पांच महीने का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक इसके संचालन के लिए न तो नई कंपनी नामित हुई और न ही पुरानी कंपनी के कर्मचारी वापस लौटे। ऐसे में किसी तरह जल निगम इस प्लांट को संचालित कर रहा है लेकिन अब जल निगम ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। इससे किसी भी दिन ये प्लांट बंद हो जाएगा और पूरी सीवर लाइन ही बेकार हो जाएगी। अगर प्लांट बंद हुआ तो घरों में जलभराव और गलियों में जलभराव की समस्या आना तय है। इसका भी जल निगम को डर सता रहा है।
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1.75 करोड़ कंपनी का है बकाया
सीवरेज प्लांट शुरू होने के बाद से ही हाइड्रो एयर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा एसटीपी संचालित किया जा रहा था। इस कंपनी को भी शासन से संचालन के लिए धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। ऐसे में कंपनी का 1.75 करोड़ रुपये जल निगम पर बकाया है।
चार लाख रुपये की प्रतिमाह है जरूरत
एसटीपी का संचालन करना जल निगम के लिए आसान नहीं होगी। क्योंकि इसके संचालन के लिए औसतन प्रतिमाह चार लाख रुपये की आवश्यकता है। साल की अगर बात करें तो 48 लाख रुपये का खर्च आएगा। इतना बड़ा फंड किसी भी मद से जुटा पाना जिला प्रशासन के लिए भी आसान नहीं होगा।
मुख्य अभियंता को कराया अवगत
एसटीपी का संचालन बंद होने के बाद जल निगम के अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक सभी परेशान हैं। इस समस्या से जल निगम के अधिकारियों ने मुख्य अभियंता जल निगम आगरा को भी अवगत कराया है। अधिशासी अभियंता जल निगम ने उच्चाधिकारियों को पूरी समस्या से अवगत कराया है।
टॉयलेट के साथ बाथरूम और किचिन भी अब कनेक्ट
दो साल पहले तक सीवर लाइन से केवल टॉयलेट ही कनेक्ट थे लेकिन अब तक जल निगम ने सीवर लाइन में बाथरूम और किचिन के पाइप भी कनेक्ट कर दिए हैं। शहर में अब तक 13 हजार से अधिक घरों में कनेक्शन किए जा चुके हैं। ऐसे में अगर एसटीपी बंद हुआ और सीवर लाइन चोक हुई तो लोगों के लिए मुसीबत हो जाएगी। टॉयलेट से लेकर बाथरूम तक लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
नौ लाख लीटर सीवरेज का होता है शोधन
पावर हाउस रोड स्थित एसटीपी की क्षमता 23 एमएलडी है। इससे प्रतिदिन 23 मिलियन लीटर पानी प्रतिदिन शोधित किया जा सकता है। वर्तमान में रोजाना आठ से नौ लाख लीटर सीवेज को शोधित किया जा रहा है। शोधित के बाद पानी को नाले के माध्यम से ईशन नदी में छोड़ दिया जाता है, जिसका उपयोग किसान सिंचाई के लिए करते हैं।
लोगों की बात
एसटीपी के बंद हो जाने से सीवर लाइन धीरे-धीरे चोक होने लगेगी। इससे आम लोगों को जलभराव के रूप में समस्या का सामना करना पड़ेगा।
विजय कुमार।
अगर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट ही बंद हो जाएगा तो फिर सीवर लाइन डालने का फायदा ही क्या होगा। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
आदेश कुमार।
अभी तक शहर में सभी घरों के कनेक्शन भी सीवर लाइन से नहीं हो पाए हैं। इससे पहले ही एसटीपी का संचालन खतरे में पड़ गया है।
सोनू सिंह।
सरकार द्वारा योजनाएं तो बनाई जाती हैं, लेकिन बाद में उनके संचालन पर ध्यान नहीं दिया जाता है। इसी के चलते समस्याएं आती हैं।
विकास कुमार।
कंपनी के जाने के बाद निजी संसाधनों से ही एसटीपी का संचालन किया जा रहा है लेकिन इसे बहुत दिनों तक संचालित करना संभव नहीं है। इस संबंध में मुख्य अभियंता जल निगम को भी पत्र भेजा गया है। जैसे निर्देश मिलेंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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राजकुमार शर्मा, अधिशासी अभियंता, जल निगम।
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