मथुरा। किसानों को बीमा फसल के नुकसान का क्लेम देने से बचने के लिए बीमा कंपनी ने फसल सर्वे में ही फर्जीवाड़ा कर दिया है। खेतों में हुई धान की फसल को सर्वे में बाजरा दर्शा दिया है। इसकी शिकायत किसानों ने डीएम से की। इस पर डीएम ने जांच के आदेश देते हुए मामला शासन को संदर्भित करने के निर्देश दिए।
जिले में एक लाख से अधिक किसानों ने केसीसी के माध्यम से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत पिछले साल खरीफ की धान की फसल का बीमा कराया था। छाता से आए किसान भगवत स्वरूप पांडेय, डा. विक्रम और राधारमण ने डीएम को अवगत कराया कि खसरा में धान की फसल दर्ज है। केसीसी के बैंक रिकार्ड में भी धान की फसल दर्शाई गई है, लेकिन बीमा कंपनी टाटा एआईजी ने फसल में हुए नुकसान के बाद कंपनी सर्वे में उसे बाजरा दिखा दिया है। इससे किसान बड़ी संख्या में बीमा क्लेम से वंचित कर दिए हैं।
किसानों ने छाता तहसील के खानपुर, अलवाई, सांखी, नगरिया, धीमरी, खायरा, जलालपुर, भरनाकलां सहित 12 गांवों का रिकार्ड देते हुए डीएम को करीब 400 किसानों के साथ हुए कंपनी के इस फर्जीवाड़े की शिकायत की। इस पर डीएम सर्वज्ञराम मिश्र ने कहा कि मामला गंभीर है। उपनिदेशक कृषि को जांच के लिए आदेशित करते हुए उक्त मामले को शासन को संदर्भित करने के निर्देश दिए हैं।