फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेभाव हुआ सब्जियों का राजा, किसान परेशान

विज्ञापन
विज्ञापन
मैनपुरी। सब्जियों का राजा कहा जाने वाला आलू बेभाव हो गया है। बाजार में नए आलू की दस्तक से ही जहां पुराने आलू की बिक्री पर ब्रेक लग गया है तो वहीं नए आलू भी कम दाम में बिक रहा है। ऐसे में किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। व्यापारियों के अनुसार अभी आलू के रेट और गिर सकते हैं।
विज्ञापन


दिसंबर की शुरुआत के साथ ही नए आलू ने भी बाजार में दस्तक दे दी है। बेहतर मौसम के चलते आलू का उत्पादन भी खूब हुआ है। पुराने आलू के बेहतर दाम मिलने के चलते किसानों को उम्मीद थी कि इस बार उन्हें नए आलू की कीमतें भी अच्छी मिलेंगी। किसानों की ये उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। हुआ ये कि बाजार में नए आलू की आवक शुरू होते ही रेट गिरते चले गए। मंडी में नए आलू की कीमत जहां 500 रुपये प्रति क्विंटल से 600 रुपये प्रति क्विंटल है। वहीं पुराने आलू की कीमत भी लगभग समान ही है। ऐसे में लोग नए आलू को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।

नए आलू की अधिक आवक से इसकी कीमतें तो कम हैं ही, वहीं पुराने आलू के लिए खरीदार ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। जिले में इस बार 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की बुवाई की गई है। इससे लाखों टन आलू का उत्पादन होगा। अभी तो नए आलू की शुरुआत है। समय के साथ-साथ बाजार में इसकी आवक बढ़ती जाएगी, जिससे कीमतें और गिर सकती हैं। किसानों को इस बात की चिंता सता रही है कि अगर कीमतें और गिरती हैं तो आलू की लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।
विज्ञापन


फुटकर में 15 रुपये मिल रहा आलू
मंडी में भले ही किसानों को नए आलू की कीमत कम मिल रही हो, लेकिन फुटकर में दुकानदार खूब मुनाफा कमा रहे हैं। दुकानदार ग्राहकों को 15 रुपये प्रति किलो में आलू की बिक्री कर रहे हैं। ऐसे में दुकानदार अपनी जेबें भरने में लगे हुए हैं, लेकिन किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

32 हजार क्विंटल आलू है कोल्ड में बाकी
जिले के 48 कोल्ड स्टोरेज में तीन लाख मीट्रिक टन से अधिक आलू का भंडारण किया गया था। समय बीतने के बाद भी अब तक कोल्ड स्टोरेज में 32 हजार क्विंटल आलू भंडारित है, जो कोल्ड स्टोरेज संचालकों के लिए मुसीबत बना हुआ है। इस आलू के निस्तारण में उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।
विज्ञापन


किसानों की बात
इस बार नए आलू की अच्छी कीमतें मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कीमतें लगातार गिरती जा रही हैं। अगर ऐसे ही चलता रहा तो लागत भी डूब जाएगा।
इफ्तार, शरीफपुर।

किसान तो हमेशा से ही नुकसान उठाता रहा है। हर बार आलू की आवक के साथ ही कीमतें गिरना शुरू हो जाती हैं। किसान को मजबूरन आलू की बिक्री करनी पड़ती है।
विनीत कुमार, अंगौथा।

पुराने आलू को अब केवल खाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकांश लोग बुवाई के लिए पुराना आलू खरीदते हैं, ऐसे में मुश्किल तो होगी।
अवनीश पाठक, लहरा।

अभी तो कच्चा आलू बिक रहा है, इसमें किसान नुकसान उठा सकते हैं। सरकार को पक्के आलू की कीमतों के लिए अभी से कोई ठोस कदम उठाना चाहिए।
ओमकार सिंह, ताबेपुर।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें