मैनपुरी। युग के प्रभाव से संसार में दुराचरण बढ़ता ही चला जा रहा है। सारी
मानवता एवं देश इस भोगवादी विभीषका से त्रस्त है। चारों तरफ भ्रष्टाचार का जाल फैला हुआ है।
यह बातें भीमसेन मंदिर में चल रही शिवमहापुराण आचार्य वीरेंद्र स्वरूप द्विवेदी ने कहीं। उन्होंने कहा कि यह सदाचार सद्विचार के द्वारा ही आ सकता है।
आश्चर्य इस बात का है सद्विचार को बढ़ाने के लिए हम कोई उपाय नहीं करते। धन के भोग को बढ़ाने के लिए हम प्रयत्नशील रहते हैं। उन्होंने कहा कि विचारों से ही आचरण का निर्माण होता है।
ताड़कासुर दुराचार का प्रतीक बनकर सारे देव समाज और मानवता का शत्रु बन जाता है। उस ताड़कासुर को सद्विचार रूपी कुमार कार्तिकेय द्वारा नष्ट किया जाता है। सद्विचार की उत्पत्ति संयम की दृढ़ता से होती है।
कुमार कार्तिकेय भी संयम का पालन किया। शिवपुराण कथा में तबलावादक मुन्ना सिंह, गायक राजेश सिंह, शास्त्री रजत पांडेय भी अपना योगदान दे रहे हैं। इस मौके पर कमेटी अध्यक्ष महेश अग्निहोत्री मौजूद रहे।