फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टूट रहा गरीबों के बच्चों की पढ़ाई का सपना

विज्ञापन
डैमो
विज्ञापन
मथुरा। अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत गरीब परिवारों के बच्चों को सरकार ने प्राइवेट मानचीन विद्यालयों में निशुल्क शिक्षा दिलाने का प्रावधान किया है। लेकिन सरकारी तंत्र इस अधिकार को गरीबों तक पहुंचाने में ही रोड़ा बन रहा है। जनपद में पिछले चार माह से 228 गरीब बच्चे एडमिशन के लिए भटक रहे हैं।
विज्ञापन


भारत सरकार के उपरोक्त अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में गरीबों को 25 प्रतिशत एडमिशन देने का प्रावधान किया है। इसके तहत इस बार फरवरी माह के दौरान जनपद में 132 अभिभावकों ने आवेदन किया था। इसमें शहरी क्षेत्र से 106 ऑनलाइन और ग्रामीण अंचल से 26 लोगों ने ऑफ लाइन आवेदन किया था। इन्हें एडमिशन दिलाने के बाद निर्धारित कोटा पूरा न होने पर अप्रैल में एक बार फिर आवेदन मांगे गए।

इसमें शहरी क्षेत्र से 76 और ग्रामीण अंचल से 126 ऑफलाइन आवेदन प्राप्त हुए। इन्हें अब तक एडमिशन नहीं दिया गया। जबकि तृतीय चरण में 102 आवेदन और आ चुके हैं। लेकिन, द्वितीय और तृतीय चरण में आए आवेदनों पर अब तक एडमिशन नहीं हुए हैं।
विज्ञापन


एडमिशन की यह फाइल बीएसए और सीडीओ आफिस के बीच फंसी हुई है। अच्छे स्कूलों में अपने पाल्यों को शिक्षा दिलाने का सपना देख रहे गरीब अभिभावक परेशान हैं। उन्हें बीएसए द्वारा कोई संतोषजनक जवाब भी नहीं दिया जा रहा है। अनेक अभिभावकों ने तो अब उम्मीद भी छोड़ दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें