एक कहावत है कि अच्छे तैराक ही डूबते है। यह कहावत बंगाली छूमंतर के मामले में सही साबित हुई। 40 साल से सर्प पकड़ने में माहिर सपेरे की मौत का कारण भी सर्प ही बना। उसकी मौत से परिवार में कोहराम मच गया। लोगों के बीच में उसकी मौत चर्चा का विषय बन गई।
सुदामापुरी रोड निवासी गोविंद राम उर्फ बंगाली छूमंतर पिछले 40 साल से सर्प को पकड़ने का कार्य करता था। मंगलवार को जब कादरगंज रोड पर नागिन के होने की सूचना मिली तो अपने को रोक नहीं सका। वह नागिन को पकड़ने के लिए चला गया। उसने काफी प्रयास के बाद नागिन को पकड़ तो लिया लेकिन वह उसे पूरी तरह से काबू नहीं कर सका। नागिन ने उसे डस लिया। नागिन के डसने के बाद उसने अस्पताल जाना उचित नहीं समझा। उसे भरोसा था कि वह अपने स्वयं के इलाज से ही नागिन के जहर को उतार लेगा। उसने अपना उपचार शुरू कर दिया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। उसकी हालत बिगड़ती गई। चार घंटे बाद उसकी मौत हो गई।