आगरा। रसियों के दंगल का शोर शराबा कानून पर भारी पड़ा। न्यू आगरा में दो दिन तक चले रसियों के दंगल में रात से लेकर सुबह तक संगीत बजता रहा। चिकित्सक की शिकायत पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ध्वनि प्रदूषण की जांच की तो यह मानक से कहीं ज्यादा मिला। अब यह मामला एनजीटी में उठने जा रहे हैं।
न्यू आगरा में जन्माष्टमी के बाद 16 और 17 अगस्त को हास्पिटल के सौ मीटर क्षेत्र के अंदर रसियों का दंगल आयोजित किया गया। एडीएम सिटी के स्तर से कार्यक्रम को अनुमति दी गई थी। शाम से ही ऊंचे ऊंचे लाउड स्पीकर लगाकर रसियों का दंगल शुरू हुआ जो रात भर चला। इसकी शिकायत न्यू आगरा हास्पिटल के चिकित्सक डॉ. शरद गुप्ता ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से की। शिकायत पर बोर्ड ने ध्वनि प्रदूषण की जांच कराई तो 17 अगस्त को रात 10:45 बजे शोर का स्तर 78.17 डेसिबल था।
वहीं न्यू आगरा हास्पिटल पर यह 11.05 बजे 76.05 डेसिबल रहा। बोर्ड की रिपोर्ट के बाद प्रशासन ने आखिरी दिन रात में थाना पुलिस के जरिए लाउड स्पीकरों का शोर बंद कराया। अब इस मामले में कार्रवाई के लिए डॉ. शरद गुप्ता ने प्रशासन से मांग की है। कार्रवाई न होने पर वह इस मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में उठाने जा रहे हैं। उन्होंने एनजीटी के रजिस्ट्रार को रसियों के दंगल की फोटो वीडियो समेत शिकायत भेजी है।
रात 10 से सुबह 6 तक अनुमति नहीं
पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ध्वनि प्रदूषण पर रोक है। खास तौर पर अस्पताल, शैक्षणिक संस्थानों के 100 मीटर तथा शांत क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण पर प्रतिबंध है। रात में केवल आडिटोरियम के अंदर, कांफ्रेंस रूम या कम्यूनिटी हॉल के अंदर ही अनुमति के बाद 10-12 बजे तक लाउड स्पीकर बजाया जा सकता है। डीजे पर भी रात 10 बजे के बाद गाना बजाने पर प्रतिबंध है। सुप्रीम कोर्ट रात में तेज आवाज पर लाउड स्पीकर बजाने पर रोक का आदेश भी दे चुका है।
ये है ध्वनि प्रदूषण के मानक
क्षेत्र दिन रात
आवासीय क्षेत्र 55 45
शांत क्षेत्र 50 40
वाणिज्यिक क्षेत्र 65 55
औद्योगिक क्षेत्र 75 70
न्यू आगरा में रसियों के दंगल में रात में तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाने की शिकायत आई थी, जिसकी जांच की गई है। दोनों जगह शोर निर्धारित मानक से ज्यादा पाया गया है। इसकी रिपोर्ट प्रशासन को भेज दी गई है।
अतुलेश यादव, क्षेत्रीय अधिकारी
उ. प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड