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कुंठा और निराशा से नासमझी में खो रहे जिंदगी

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हत्या - फोटो : अमर उजाला
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एटा। उम्मीदें , सपने और इच्छाएं, हर शख्स इनको पूरा करना चाहता है। जब सपने पूरे नहीं होते तो युवा अवसाद का शिकार हो जाते हैं। बदलते दौर में युवाओं का मन उम्मीदों के बोझ में कमजोर पड़ रहा है। इसके चलते जिले में युवाओं की आत्महत्या के मामले सबसे ज्यादा बढ़े हैं। युवा कुंठा और निराशा की नासमझी में जिंदगी को खत्म कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि युवाओं का अपरिवक्व प्रेम उन्हें इस ओर धकेल रहा है।
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जिले में बीते तीन महीने में करीब 25 आत्महत्याओं के मामले सामने आए। इसमें 12 मामले युवाओं की आत्महत्या के हैं। साथ ही 7 युवाओं ने प्रेम में असफलता के चलते जिंदगी का साथ छोड़ दिया। विशेषज्ञ मानते हैं कि युवा मनों में काफी सारीं उम्मीदें होती हैं। जब वे पूरी नहीं होतीं तो निराशा और कुंठा में वे मौत को ही सही रास्ता समझते हैं और नासमझी में गलत कदम उठा लेते हैं। बुधवार को अलीगंज में हुई घटना के पीछे का सच भी यही है। प्रेम में असफल युवक ने छात्रा को मौत के घाट उतार दिया।
परिवार परामर्श केंद्र की काउंसलर डा. श्यामलता वेद कहती हैं कि युवा अपने साथी के प्रति आकर्षित होते हैं और जब वे इसमें सफल नहीं होते तो आत्महत्या करते हैं।
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परिवार परामर्श केंद्र की काउंसलर सपना यादव कहती हैं कि युवाओं में अपरिपक्व प्रेम प्रसंग होता है। इससे थोड़ा भी असहज होने पर वे तनाव में चले जाते हैं। आज के युवा को प्यार की नही बल्कि एक दूसरे पर कब्जे की चिंता है।

समझदारी से लें काम
समाजशास्त्री डा. हरिओेम शर्मा कहते हैं कि प्रेम प्रसंग में मिली असफलता में परिवार और दोस्तों का प्यार दवाई का काम करता है। बच्चों के व्यवहार में आ रहे परिवर्तन पर अभिभावकों को समझदारी से ध्यान देने की भी जरूरत है। अभिभावक को डांट डपट की बजाय एक दोस्त बनकर अपने बच्चों को भावनात्मक रूप से मजबूत करना होगा।
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कहते हैं आंकड़े
40 फीसदी युवा बढ़ रहे आत्महत्या की ओर
4168 युवाओं ने देश में आत्महत्या की वर्ष 2014 में
12 युवा जिले में तीन महीने में लगा चुके मौत को गले
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