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तंबाकू में 70 खतरनाक रसायन: युवाओं को बना रहे कैंसर-सांस रोगी, ये आदतें खत्म कर रहीं  रोग प्रतिरोधक क्षमता

Sat, 31 May 2025 08:29 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

गुटखा, सिगरेट समेत किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो रही है। 20 से 40 साल की उम्र के 21.75 फीसदी कैंसर के मरीज मिल रहे हैं। 

 
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विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2025 - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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खैनी, गुटखा, हुक्का या फिर सिगरेट। किसी भी रूप में तंबाकू रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म कर रही है। इससे 20-30 की उम्र में कैंसर, सांस रोग, नसों में रुकावट की बीमारी हो रही है। एसएन मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विभाग के शोध में सबसे ज्यादा 21.75 फीसदी 20-40 साल की उम्र के कैंसर रोगी हैं। अधिकांश को किशोरोवस्था में ही नशे की लत लग गई।
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कैंसर रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुरभि गुप्ता ने बताया कि तंबाकू में 4 हजार से अधिक नुकसानदेय रसायन होते हैं। इनमें से 250 हानिकारक और 65-70 कैंसरकारक हैं। इनमें बेंजीन, आर्सेनिक, कैडिमियम, फार्मेल्डिहाइड, क्रोमियम, कोबाल्ट, मर्करी, निकोटिन, हाइड्रोजन साइनाइड, पोलोनियम, कैडमियम सबसे ज्यादा खतरनाक हैं। 500 मरीजों के अध्ययन में 20-30 साल के 4.25 फीसदी, 31-40 की उम्र के 17.5 प्रतिशत, 41-50 की उम्र के 28 फीसदी और 51-60 की उम्र के 27 फीसदी को गले, जीभ, गर्दन, मुख का कैंसर मिला। इनको सांस रोग, पेट रोग समेत अन्य बीमारियां भी मिलीं।

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नसों में रुकावट से युवाओं में हार्टअटैक-स्ट्रोक
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय गुप्ता ने बताया कि तंबाकू के सेवन से नसों में सूजन आने से हृदय और मस्तिष्क की नस में रुकावट आ जाती है। इससे युवाओं में हार्टअटैक- स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं। फेफड़ों की कार्यक्षमता भी कम हो रही है, जिससे सांस रोग और टीबी भी हो रही है। 30 की उम्र में भी इसके मरीज मिल रहे हैं।

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इच्छाशक्ति, आदतों में सुधार से छूट सकती है लत
आगरा कैंसर सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. पारुल अग्रवाल ने बताया कि तंबाकू-सिगरेट छोड़ने पर विड्रॉल सिंड्रोम जैसे कि हाथ-पैरों में कंपन, नींद न आना, चिड़चिड़ापन, भूख न लगने जैसी दिक्कत होती है। ऐसे में पानी पीएं, निकोटिन चुइंगम, सौंफ-इलायची, धनिया की मिगी चबाएं। योग-ध्यान करें और पसंदीदा शौक पूरा करने में समय लगाएं।

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नशाखोरी भी मानसिक विकार, इलाज कराएं
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के निदेशक डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि नशाखोरी भी मानसिक विकार है। इसके इलाज के लिए संस्थान में अलग से केंद्र बना हैं। विशेषज्ञों की काउंसिलिंग और दवाओं से 6-12 महीने में मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है। 24 घंटे हेल्पलाइन नंबर (14416 ) भी है, जिस पर परामर्श भी ले सकते हैं।
 
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