आगरा के शमसाबाद के गांव गढ़ी में मंगलवार को घर के सामने खेलते समय 6 वर्षीय मूक-बधिर बालिका लापता हो गई थी। रातभर परिजन और पुलिस की टीमें खोजबीन में जुटी रहीं। ड्रोन कैमरों की भी मदद ली गई। बाद में बालिका के तालाब में डूबने की आशंका पर तलाश की गई। करीब 26 घंटे बाद बालिका का शव गांव के ही मिल गया। वह तालाब तक कैसे पहुंची? इसकी जांच की जा रही है। आशंका है कि वह खेलते हुए तालाब किनारे पहुंची होगी। पैर फिसलने की वजह से गिर गई। बेटी की मौत से परिवार में कोहराम मच गया।
शमसाबाद थाना क्षेत्र के गांव गढ़ी निवासी सत्य प्रकाश शर्मा की बेटी अनु मूक-बधिर थी। परिजन के मुताबिक, मंगलवार को दोपहर 3 बजे वह घर के बाहर खेल रही थी, तभी लापता हो गई। देर तक उसके नजर नहीं आने पर परिजन तलाश में लगे गए। आसपास के लोगों से पूछताछ के बाद भी कुछ पता नहीं चला तो घबरा गए। अनहोकी की आशंका पर पुलिस को जानकारी दी। गांव के लोग भी उसकी तलाश में जुट गए, लेकिन कुछ पता नहीं चला। घरवालों ने पुलिस को सूचना दी। बालिका के लापता होने की खबर लगते ही मौके पर डीसीपी पूर्वी अभिषेक अग्रवाल, एसीपी गिरीश कुमार आसपास के थानों की पुलिस के साथ जुटे।
पुलिस की टीमें गठित कर बालिका की खोजबीन शुरू की गई। रातभर खोजबीन के बाद भी बालिका का कुछ पता नहीं चला। बुधवार की सुबह डॉग स्क्वैड को भी बुलाया गया। खोजी कुत्ते के घर के पीछे करीब 100 मीटर दूर स्थित तालाब के आसपास ही घूमने से पुलिस अधिकारियों को बालिका के तालाब में डूबने की आशंका हुई। इसके बाद स्थानीय गोताखोरों को तालाब में खोजबीन के लिए लगाया गया। साथ ही पीएसी के भी गोताखोर बुलाए गए। इसके अलावा तालाब को खाली करने के लिए आठ पंपिंग सेट लगाकर चालू किए गए।
घटनास्थल पर डीसीपी पूर्वी अभिषेक अग्रवाल एवं एसीपी गिरीश कुमार कैंप किए हुए थे। करीब 26 घंटे की मशक्कत के बाद शाम पांच बजे बजे तालाब से बालिका का शव मिला। डीसीपी पूर्वी जोन अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि खेलते समय बालिका के तालाब में डूबने की आशंका है। पैर फिसलने से हादसा हुआ होगा। हालांकि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। साथ ही प्रकरण की जांच की जा रही है। वहीं गांव वाले भी हादसा मान रहे हैं।
मां का रो-रोकर बुरा हाल
सत्य प्रकाश के तीन बच्चे दो बेटियों और एक बेटे में अनु तीसरे नंबर की थी। सत्य प्रकाश किसान हैं। बेटी की मौत से परिवार में मातम छा गया। मां रूबी बेटी को बार-बार पुकारते हुए बेहोश हो जा रही थी। परिवार और गांव की महिलाएं उन्हें संभाल रही थीं।