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कहीं फिटिंग नहीं तो कहीं कनेक्शन का इंतजार

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एटा। स्कूलों के विद्युतीकरण पर खर्च हुआ करोड़ों रुपया बच्चों का राहत नहीं दे पा रहा। गर्मी से जूझ रहे बच्चे शासन के वादों को झूठा बता रहे हैं। कई स्कूलों में पंखे उपकरण नहीं हैं तो कई में विद्युत कनेक्शन की दरकार है।
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शासन के दावों के बाद भी परिषदीय स्कूलों का हाल नहीं सुधर रहा। बिजली फिटिंग एवं कनेक्शन के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च का असर नहीं दिखा रहा। गर्मी के जूझ रहे बच्चों को विद्युत सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं। भीषण गरमी में भी इन्हें पंखे की हवा नहीं मिल पा रही। कक्षाओं में बैठे पसीने से तरबतर बच्चे कापी किताबों से हवा कर पसीना सुखाने को मजबूर हैं। शहर के छह स्कूलों का हाल तो और भी बुरा है। यहां उपकरण तो दूर फिटिंग ही नहीं है।
रेवाड़ी मोहल्ला, तकिया, होली मोहल्ला एवं आधारिक स्कूलों में पंखे-ट्यूब लाइट तो दूर फिटिंग ही नहीं है। ऐसे में बच्चे टीचर गर्मी में ही पठन पाठन करते हैं। अभिभावकों का कहना है कि बच्चे गर्मी से तरबतर रहते हैं। इन स्कूलों में तो रंगाई पुताई तक नहीं होती। शहर के कैलाश मंदिर स्थित प्राथमिक विद्यालय का हाल और भी बुरा है। यहां भवन के नाम पर केवल टीन शेड ही है। जहां बैठकर बच्चे पढ़ाई करते हैं। इन दिनों यहां गरमी का कहर चरम पर है।
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प्राथमिक विद्यालय नगला बनवारी की प्रधानाध्यापिका संतोष यादव ने बताया कि स्कूल में फिटिंग तो है लेकिन अभी तक कनेक्शन नहीं किया गया है। ऐसे में पंखा आदि शोपीस बने हुए हैं। इसे लेकर कई बार मौखिक एवं लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं।
शीतलपुर ब्लाक के नगला फरीद, नगला मांची स्थित स्कूलों में भी कनेक्शन नहीं है। ऐसे में हजारों की फिटिंग, पंखे उपकरण शोपीस बने हुए हैं। प्रधानाध्यापक लोकपाल सिंह यादव ने बताया कि चुनाव के चलते कनेक्शन किया गया था। लेकिन चुनाव के अगले ही दिन केबिल गायब मिली। पूछने पर बताया गया कि बिजली विभाग के लोग इसे उतार ले गए।
नगर क्षेत्र में किराए के भवनों पर विवाद है। इसके चलते यहां विद्युत सुविधाएं सुनिश्चित नहीं हो पा रही। वहीं ग्रामीण अंचल के शत प्रतिशत स्कूलों में फिटिंग हो चुकी है। कनेक्शन का पैसा बिजली विभाग को भेज दिया गया है। लेकिन संयोजन न होने की शिकायतें हैं। इन्हें फिर पत्र लिख दिया गया है।
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नीरजा चतुर्वेदी, खंड शिक्षा अधिकारी शीतलपुर
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