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होमगार्ड के आश्रित को तीन लाख रुपये और नौकरी दिलाने की तैयारी

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होमगार्ड के आश्रित को तीन लाख रुपये और नौकरी दिलाने की तैयारी - फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। जहर खाकर आत्महत्या करने वाली होमगार्ड के आश्रित को सहायता राशि और नौकरी दिलाने की तैयारी की जा रही है। होमगार्ड विभाग ने योजना का लाभ दिलाने के लिए पत्रावली तैयार कराना शुरू कर दिया है, लेकिन योजना का लाभ अब अधिकार के साथ नहीं बल्कि अनुरोध पर दिलाने की तैयारी की जा रही है। कारण है कि परिजनों ने मृतक शव और उसकी पुत्री के शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया था।
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मंगलवार को कोतवाली में तैनात मिरहची के गांव नगला श्याम की होमगार्ड पुष्पा एवं उसकी बेटी संध्या ने जहर खाकर जान दे दी थी। मृतकों के शव गांव ले जाए गए जहां सूचना पर पहुंची पुलिस ने पोस्टमार्टम की तैयारी की, लेकिन परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। परिजनों की अनभिज्ञता ने मृतक के परिवार को मुसीबत में डाल दिया। क्योंकि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए शव का पोस्टमार्टम होना जरूरी है। होमगार्ड विभाग में नियम है कि सड़क हादसे में मरने वाले होमगार्ड के आश्रित को 5 लाख और अन्य कारणों से मौत होने पर होमगार्ड के आश्रितों को 3 लाख रुपये दिए जाते हैं। इसके अलावा मृतक आश्रित को विभाग में नौकरी देने का प्रावधान है। होमगार्ड विभाग ने इन योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए पत्रावली तैयार कराने का काम शुरू किया है, लेकिन अधिकार के साथ यह दावे नहीं किए जा सकते। क्योंकि मृतक आश्रित को किसी योजना का लाभ दिलाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का होना जरूरी है।
गांव में पसरा सन्नाटा
मिरहची। महिला होमगार्ड और उसकी बेटी की मौत के बाद गांव में दूसरे दिन भी सन्नाटा पसरा हुआ देखने को मिला। हालांकि पीड़ित परिजनों को शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे। वहीं दोनों बेटियों का रो रोकर बुरा हाल बना हुआ है। बुधवार सुबह क्षेत्र के लोग तथा रिश्तेदार पीड़ित परिजनों को शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे। मां और बहन को खो देने के बाद दोनों बहनों का रो रोकर बुरा हाल था। गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था। हर कोई मां बेटी के एक साथ जहर खाने को लेकर सन्न था। कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं था।
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नहीं खुल रही जुबां, आत्महत्या बनी रहस्य
होमगार्ड पुष्पा एवं उसकी पुत्री की आत्महत्या की कहानी रहस्य बनकर रह गई है। नगर की शिवपुरी कॉलोनी में होमगार्ड कुछ ही महीनों से ही रह रही थी। इसलिए पड़ोसियों से ज्यादा लगाव नहीं था। कोई भी पड़ोसी कुछ बताने को तैयार नहीं है। वहीं परिजन भी दो मौत के बाद मौन साधे हुए हैं।
- परिजनों ने तो कोई तहरीर दी है और न ही लिखित जानकारी। फिर भी पुलिस ने अपने स्तर से घटना का कारण जानने की कोशिश की, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट कारण पता नहीं चल रहा- जितेंद्र कुमार, प्रभारी निरीक्षक, अपराध।
- सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचा था। परिजनों से कहा कि पोस्टमार्टम करा लो, लेकिन वे तैयार नहीं हुए। बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट के किसी भी योजना का लाभ अधिकार से नहीं ले सकते। फिर भी अनुरोध के साथ पत्रावली कल्याण कोष के लिए भेजेंगे। मृतक का बेटा या पति नौकरी की योग्यताएं पूरी करेगा तो उसे मृतक आश्रित योजना के तहत नौकरी दी जाएगी। - अनिल कुमार सिंह, कमांडेंट होमगार्ड।
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