एटा। जिला अस्पताल के हालात नहीं बदल पा रहे हैं, यहां पर तीन महीने से एंटी रैबीज की कमी जिले के लोगों को खल रही है। इंजेक्शन नहीं मिलने से लोगों को खासा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल चाहे जितनी अपनी पीठ थपथपाए, मगर व्यवस्था आज भी पूरी तरह से सुधारात्मक नहीं हो पाई हैं। एंटी रैबीज की कमी लोगों को खल रही है, कुत्ता काटे के इंजेक्शन नहीं होने से लोग मायूस होकर लौट रहे हैं। मगर लौटते समय उनके अंदर एंटी रैबीज के इंफेक्शन फैलने का भय साफ तौर पर देखा जा सकता हैं। ऐसे में लोग अपनी जिंदगी की सुरक्षा के लिए निजी खर्चे पर ही इंजेक्शन खरीद ने को मजबूर हो रहे हैं। बाजार में एंटी रैबीज की कीमत 300 से 400 रुपये के बीच होने के बावजूद भी लोग खरीद रहे हैं। ऐसे में प्राइवेट खर्च गरीबों की जेब ढीली कर रहा है और लोग एंटी रैबीज के इंफेक्शन से बचने के लिए भारी कीमत चुका रहे हैं।
एंटी रैबीज की आपूर्ति पूरे प्रदेश में नहीं हो पा रही है, इसकी मांग के लिए कई बार शासन व सप्लायर कंपनी को लिखा जा चुका है, बीच-बीच में आपूर्ति हुई भी है। मगर एंटी रैबीज की अधिक मांग होने की वजह से जल्द ही खत्म हो जाते हैं।
डा. प्रदीप गुप्ता, सीएमएस