मैनपुरी। अफसरों की कार्यशैली और समस्याओं के निराकरण नहीं होने से क्षुब्ध किसानों ने मंगलवार को करहल रोड स्थित बिजली उपकेंद्र पर ताला जड़ दिया। इस दौरान लाठी लेकर आए किसानों ने तीन घंटे तक कार्यालय के बाहर धरना देकर जमकर नारेबाजी की। सूचना पर मौके पर अधिशासी अभियंता पहुंचे। उन्होेंने समस्याओं के निराकरण के आश्वासन दिया। इसपर किसान शांत हुए।
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष तिलक सिंह राजपूत के नेतृत्व में किसान करहल रोड स्थित सब स्टेशन पहुंचे। इसके बाद उन्होंने सब स्टेशन के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। इसके बाद धरना शुरू कर दिया। इस दौरान जिलाध्यक्ष तिलक सिंह राजपूत ने कहा कि विद्युत विभाग की मनमानी के विरोध में किसान एकजुट होकर अपना हक लेकर ही रहेंगे।
किसान के खून पसीने की कमाई से वेतन लेने वाले अधिकारी और कर्मचारी किसान की जायज मांगों की अनदेखी कर रहे हैं। राजा ठाकुर ने कहा कि विभाग में जमकर भ्रष्टाचार है। विभाग के कर्मचारी ही बिजली चेारी कराकर विभाग को प्रतिमाह लाखों के राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं।
किसान का बकाया के नाम पर हर जगह जमकर शोषण किया जा रहा है। अहिवरन सिंह यादव ने कहा कि किसानों के वोट से चुने जाने वाले एमपी, एमएलए जीतने के बाद किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं कराते हैं। अब किसान जागरूक हो चुका है।
इस दौरान योगेंद्र प्रसाद दुबे, हरीसिंह राजपूत, राधेश्याम शाक्य, रजनेश, उदयवीर सिंह यादव, बेंचेलाल राजपूत, चरनसिंह, अनुज प्रताप सिंह, शेरसिंह शाक्य ने भी संबोधित किया। बाद में सब स्टेशन पहुंचे अधिशासी अभियंता राजकुमार ने किसानों की समस्याओं संबंधी ज्ञापन को धरना स्थल पर ही पहुंचकर लिया।
ज्ञापन में बताई गई समस्याओं के शीघ्र निराकरण कराने का आश्वासन दिया। अधिशासी अभियंता के आश्वासन के बाद ही किसान शांत हुए। जिलाध्यक्ष ने चेतावनी दी अगर 15 दिन में समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो किसान प्रभावी आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
किसानों द्वारा सब स्टेशन के मुख्य द्वार पर ताला लगाने केे बाद विभाग का एक कर्मचारी कार्यालय पहुंचा। उसने कार्यालय में जाने के लिए जब ताला खोलने को कहा तो किसानों ने उसकी जमकर नोकझोंक हुई। किसानों ने हंगामा करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी तो कर्मचारी वहां से चला गया।
सब स्टेशन पर ताला लगने से तीन घंटे तक कार्यालय में अफरातफरी का माहौल रहा। कार्यालय में बंद कर्मचारी अपनी सीटों पर बैठे ही कामकाज निपटाते रहे। किसान उनके खिलाफ नारेबाजी करते रहे, मगर किसी कर्मचारी ने अपनी सीट से उठने तक की हिम्मत नहीं जुटाई। तीन घंटे बाद ताला खुलने पर ही कार्यालय का माहौल सामान्य हुआ।