यमुना नदी में पूजन सामग्री डालने वालों के खिलाफ पांच हजार रुपये जुर्माना करने का आदेश नेशनल ग्रीन टिब्यूनल ने दिया है, लेकिन यमुना की इस दुर्दशा के लिए जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। एनजीटी ने यमुना के डूब क्षेत्र में हुए निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए 2013 में आदेश दिया था, तब आगरा विकास प्राधिकरण और सिंचाई विभाग ने कुछ दिन चिह्नांकन की खानापूर्ति की। दोनों विभागों ने संयुक्त सर्वे के बाद तकरीबन 59 निर्माणों को नोटिस जारी किया, लेकिन अब तक निर्माणों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
हालात ये हैं कि नदी के किनारों को पाटकर खुले आम निर्माण किए जा रहे हैं। विकास प्राधिकरण और सिंचाई विभाग ने सर्वे के बाद नदी के किनारे बने कुछ फार्म हाउस और कुछ पुराने निर्माणों को नोटिस दिए हैं, जबकि डूब क्षेत्र में दर्जनों इमारतें खड़ी हो गई हैं। जिन 59 निर्माणों को नोटिस दिए गए हैं उनकी भी फाइलें धूल फांक रही हैं। सुप्रीम कोर्ट मानीटरिंग कमेटी के सदस्य डीके जोशी का कहना है कि यमुना नदी के फ्लड प्लेन में कई बड़े बिल्डरों के निर्माण भी आ रहे हैं।
इस सप्ताह आएगी एनजीटी की टीम
सुप्रीम कोर्ट मानीटरिंग कमेटी के सदस्य डीके जोशी ने बताया कि इस मामले को ग्रीन ट्रिब्यूनल में पूरी मजबूती के साथ उठाया जाएगा। इसके लिए इस सप्ताह ट्रिूब्यूनल के वकील और अन्य अधिकारी आगरा आ रहे हैं। वे यमुना के किनारों का निरीक्षण करेंगे। वहां हो रहे निर्माणों की जांच की जाएगी। साथ विकास प्राधिकरण और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ फ्लड प्लेन का भौतिक सत्यापन होगा। उसके बाद मामले को मजबूती को उठाया जाएगा।