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घोषणा तो छोड़ो सीएम ने सोरों का नाम तक नहीं लिया

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सोरों को तीर्थ स्थल घोषित करने की मांग - फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। तीर्थनगरी सोरों की उम्मीदें एक बार फिर से धराशायी हो गई हैं। मुख्यमंत्री की ओर सुंदरीकरण के लिए निहार रही तीर्थनगरी को निराशा हाथ लगी है। मुख्यमंत्री की उपेक्षा से पुरोहितों में मायूसी छाई हुई है। पुरोहित अब आंदोलन की राह पर आगे बढ़ेंगे।
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प्रदेश सरकार ने बजट में राजापुर को तुलसी पीठ देने की घोषणा कर दी। जिससे पुरोहितों में आक्रोश था। पुरोहित काफी लंबे समय से यह उम्मीद लगाए बैठे थे कि पूर्व में मुख्यमंत्री द्वारा सोरों को पर्यटकस्थल घोषित किए जाने का वादा पूरा होगा, लेकिन बजट में विपरीत संकेत मिलने के बाद पुरोहित आक्रोशित हो गए। सरकार के खिलाफ गुस्साए पुरोहितों ने आंदोलन शुरू किया। इस बीच मुख्यमंत्री का एटा में दौरे का कार्यक्रम निर्धारित हो गया। पुरोहितों को उम्मीद थी कि अब निश्चित ही सोरों के डीपीआर को हरी झंडी मिल जाएगी। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एटा में मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखने आए। लेकिन पूरे संबोधन में सोरों का कहीं कोई जिक्र नहीं किया। सोरों के डीपीआर को हरीझंडी न मिलने से तीर्थनगरी की उम्मीद टूट गई। पुरोहित मायूस हो गए। पुरोहितों ने सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया है। पुरोहितों का कहना है कि सरकार ने तीर्थनगरी के साथ सौतेला व्यवहार किया है।
लगी रही सीएम की ओर टकटकी
सोरों के तमाम पुरोहित उम्मीदों को लेकर सीएम के कार्यक्रम में पहुंचे। यह पुरोहित सीएम के संबोधन के दौरान एक ही टकटकी लगाए रहे कि सीएम कब सोरों का जिक्र कर उसके विकास को बजट देंगे। जो पुरोहित एटा नहीं पहुंच सके वे टीवी पर सीएम का संबोधन सुनते रहे। संबोधन समाप्त होते ही पुरोहित निराश हो गए।
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अब चलेगा चरणबद्ध आंदोलन
कासगंज। सोरों के पुरोहितों ने अब आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। आंदोलनकारी भूपेश शर्मा ने कहा कि अब आगामी आंदोलन की रूपरेखा बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री से तमाम उम्मीदें थीं, लेकिन उम्मीदें पूरी नहीं हुई हैं। तीर्थपुरोहित जल समाधि लेने को तैयार हैं।

तीर्थनगरी की उपेक्षा पर बोले पुरोहित, छलका दर्द

तीर्थनगरी को विकास का पैकेेज मिलेगा। इसकी प्रबल संभावना थी। भाजपा नेताओं ने भी भरोसा दिलाया था कि एटा में मुख्यमंत्री सोरों के विकास को बजट देेंगे, लेकिन मुख्यमंत्री ने पुरोहितों को मायूस किया है।
सतीश भारद्वाज
हमें सिर्फ तीर्थनगरी का विकास चाहिए और तुलसी बाबा का हक चाहिए, लेकिन सरकार हमारी भावनाओं की ओर कोई ध्यान नहीं दे रही। हमें सोरों को विकास का पैकेज मिलने की काफी उम्मीद थी। यह उम्मीद धराशायी हो गई।
नीतेश मेधावी
मुख्यमंत्री की यह उपेक्षा ठीक नहीं है। यदि यही हाल रहा तो आगामी चुनाव में भाजपा को खामियाजा भुगतना पड़ेगा। पुरोहित इसका जवाब देंगे। पुरोहितों की ताकत का एहसास भाजपा को कराया जाएगा।
वंशीधर शास्त्री
जब तक मुख्यमंत्री सोरों को विकास के लिए बजट नहीं देंगे। पुरोहित आंदोलन की राह पर रहेंगे। हमें हर हाल में तीर्थनगरी और तुलसी बाबा का हक चाहिए। जब तक सरकार हक नहीं देती है तब तक सरकार को विरोध झेलना पड़ेगा।
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हरीओम शास्त्री
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