फिरोजाबाद। केंद्र सरकार के कार्यकाल का अंतिम बजट पेश किया गया। चुनावी साल होने के कारण उद्यमियों को पूरी उम्मीद थी कि कांच उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बजट में नए प्रावधान करने चाहिए थे, परंतु बजट में ऐसा कुछ नहीं रहा।
सुहागनगरी का कांच उद्योग देश-विदेश में विख्यात है। इस कांच उद्योग से सरकार को हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता है। इसके बावजूद कांच उद्योग की समस्याएं कम नहीं हो पा रहीं।
जीएसटी लागू होने के बाद कच्चा माल, कैमीकल से लेकर सबकुछ महंगा गया। इससे कांच उत्पादन लागत बढ़ गई। प्रमुख उद्यमी अभिषेक मित्तल चंचल का कहना है कि कांच उद्योग में सबसे अधिक खर्च प्रतिदिन खर्च होने वाली गैस है। बजट से उम्मीद थी कि गैस को जीएसटी के दायरे में लाया जाएगा, परंतु ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया।
चूड़ी उद्यमियों को उम्मीद थी कि लोन पर ब्याज कम किया जाता तो बेहतर रहता। जीएसटी में कांच की चूड़ी टैक्स फ्री है। केमीकल, कच्चा माल खरीदने पर 18 प्रतिशत टैक्स लगता है, परंतु उसका रिफंड नहीं मिलता। उद्यमियों का कहना है कि बजट में मात्र एक रियायत दी गई है टीडीएस की सीमा 10 हजार से बढ़ाकर 40 हजार कर दी है।
मोदी ने हर वर्ग के लिए अच्छा बजट पेश किया है। चुनावी वर्ष होने के कारण कांच उद्योग को जिस तरह अंतिरम बजट से उम्मीद थी, उस हिसाब से कांच उद्योग के लिए अलग से कोई घोषणा नहीं की गई। हनुमान प्रसाद गर्ग ,डायरेक्टर, दि ग्लास इंडस्ट्रियल सिंडीकेट
फिरोजाबाद कांच निर्यात को बड़ा क्षेत्र है। कांच निर्यातकों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। एक्सपोर्ट उद्योग को अंतिरम बजट से निराशा हाथ लगी है। आयकर में टैक्स का दायरा बढने से श्रमिकों को काफी फायदा मिलेगा। मुकेश बंसल टोनी,अध्यक्ष, ग्लास मैन्यूफेक्चरर एंड एक्सपोर्टर एसोसिएशन