मैनपुरी। कोल्ड स्टोरेज से आलू निकासी की अंतिम तिथि बीतने के बाद भी किसानों ने आलू की निकासी नहीं की। ऐसे में अब जिले के शीतगृह संचालकों को आलू के सड़ने की चिंता सता रही है। इससे कोल्ड स्टोरेज संचालकों को नुकसान भी उठाना पड़ेगा।
जिले में किसानों ने तीन लाख मीट्रिक टन आलू का भंडारण कोल्ड स्टोरेज में किया था। बुवाई के साथ ही निकासी भी शुरू हुई। कीमत अच्छी रहने से कोल्ड स्टोरेज संचालकों को भी इस बार आलू निकासी की पूरी उम्मीद थी। शुक्रवार को अंतिम तिथि बीतने के बाद भी जिले के 48 कोल्ड स्टोरे में 30 हजार क्विंटल से अधिक आलू रह गया।
अब इस आलू के निस्तारण की जिम्मेदारी कोल्ड स्टोरेज संचालकों की होगी। इसमें से अधिकांश आलू या तो गुल्ली है या फिर सड़ गया है। ऐसे में इसकी बिक्री भी संभव नहीं है। जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय के निर्देश के बाद कोल्ड स्टोरेज संचालकों ने इस आलू के निस्तारण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
शनिवार को कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन की बैठक हुई। इसमें जिलाध्यक्ष विनय गुप्ता ने कहा कि अगर किसान आलू निकालने के लिए आते हैं तो उन्हें आलू दिया जाएगा, लेकिन अब कोल्ड स्टोरेज संचालक की कोई जिम्मेदारी नहीं है। अगर आलू सड़ गया है या फिर फेंक दिया गया है तो किसान दावा नहीं कर सकेंगे।