एटा। एटा डिपो में रोडवेज कर्मियों द्वारा किए गए एमएसटी घोटाले की परत मंडलीय टीम द्वारा खंगाले गए अभिलेखों में सामने आ गई। अधिकारियों सहित कर्मचारियों की गर्दन फंसने पर आनन-फानन में लाखों रुपये भी एटा डिपो में जमा भी कर दिए। अभी टीम द्वारा जांच की जा रही है। हालांकि अभी घोटाला और उजागर होने की संभावना जताई जा रही है।
एटा डिपो में बड़े पैमाने पर घोटालों की शिकायत शासन तक पहुंची। ऐसे में जांच के लिए मंडलीय कार्यालय (क्षेत्रीय) पर टीम गठित की गई। टीम ने एटा डिपो में एमएसटी बनाने के अभिलेखों को सबसे पहले अपने हाथ में लिया। इन अभिलेखों में बड़े स्तर पर घोटाला सामने आया है। इसकी भनक लगते ही घोटाले में संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों ने आनन फानन में 1.36 लाख रुपये एटा डिपो के खाते में जमा करा दिए। अभी टीम द्वारा घोटाले की जांच की जा रही है
। एटा से पहले लखनऊ में एमएसटी घोटाला उजागर हो चुका है। इसमें बड़े-बड़े अधिकारियों की गर्दन फंस चुकी है। लखनऊ के बाद एटा में घोटाला उजागर होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। टीम में एकाउंट के जानकारों को शामिल किया गया है जो परत-दर-परत अभिलेख जांचने में जुटे हैं। टीम ने मंगलवार को भी डिपो के अभिलेखों को खंगाला। इसमें कुछ अभिलेख जांच टीम अपने साथ ले गई है। इस संबंध में एआरएम मदललाल ने कुछ भी बोलने से साफ मना कर दिया है।
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डिपो रिटर्न से हो चुका है घोटाला
एटा डिपो में डिपो रिटर्न से होने वाले घोटाले की गूंज शासन तक पहुंची थी। इसकी भी जांच के लिए मंडलीय एकाउंट विशेषज्ञों की टीम एटा डिपो भेजी गई थी। जांच में शुरूआती दौर में एमएसटी घोटाला उजागर हो गया। हालांकि डिपो रिटर्न के माध्यम से घोटाले की जांच जिला स्तर पर एडीएम प्रशासन धर्मेंद्र कुमार को भी मिल चुकी है। इस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे पूर्व ही मंडलीय टीम ने एमएसटी घोटाले को उजागर कर दिया।