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बरसात से पहले छत का सपना नहीं होगा पूरा

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मैनपुरी। बरसात का मौसम आने वाला है। ऐसे में उन लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं जिन के सिर पर छत नहीं है। सरकार की ओर से कई आवास योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। योजनाओं में फंसे पेंच और जांच की प्रक्रिया के चलते पात्र होने के बावजूद भी बरसात से पहले छत का सपना पूरा होते नहीं दिख रहा है।
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जिले में वतर्मान में प्रमुख रूप से आसरा आवास योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना चल रही हैं। इन योजनाओं के तहत गरीब लोगों को छत मुहैया कराना सरकार का लक्ष्य था। जिले के अधिकारी सरकार की योजनाओं को पलीता लगाने में जुटे हुए हैं। तीनों ही आवास योजना के तहत गरीबों को छत मुहैया कराने का कार्य पूरा नहीं हो सका है।

आसरा आवास योजना के तहत जिले में 396 लाभार्थियों को आवास दिए जाने थे। जिले में 11 करोड़ रुपये की लागत से आसरा आवास बनाए गए। वर्ष 2012 में आवंटन के लिए प्रथम चरण के आवेदन भरे गए। 1274 लोगों ने आवेदन किए। वहीं 440 लोग पात्र गए। वर्ष 2017 तक आवासों का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। निमार्ण कार्य पूरा होने के बाद दोबारा जांच कराई गई, तो 82 लोग कम मिले और पात्रों की संख्या 358 ही रह गई।
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इनमें ज्यादातर लोग आसरा आवासों की आस को छोड़कर कहीं और निवास करने लगे। कई लोग इस दुनिया को ही छोड़कर चले गए। दोबारा 179 लोगों ने आवेदन किए। इसमें 100 लोग पात्र गए। जिले में आवासों का आवंटन तो कर दिया गया, लेकिन दो महीने गुजर जाने के बाद भी अभी तक लाभार्थियों को चाबी नहीं सौंपी गई है।

जिले में मुख्यमंत्री आवास योजना में अधिकारियों की लापरवाही साफतौर पर झलक रही है। इसके सत्यापन की अंतिम तरीख 16 अप्रैल 2018 रखी गई, लेकिन सत्यापन का कार्य पूरा नहीं हो सका। तारीख को बढ़ाकर 10 मई कर दिया गया। इसके बाद भी अधिकारियों ने सत्यापन का कार्य पूरा नहीं किया। जबकि कार्य पूरा नहीं होने पर वेतन रोके जाने के आदेश थे, लेकिन न वेतन रोका गया और नहीं ही कोई कार्रवाई की गई। अंतिम तारीख को भी बढ़ाकर 25 मई कर दिया गया। मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवासों की संख्या का अभी खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक जिले में नौ ब्लॉक हैं। एक ब्लॉक में 60 से 70 गांव हैं। एक गांव में 80 से 100 आासों का आवंटन होना है।

प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत नगर पालिका में 627 और नगर पंचायतों में 1885 लोगों को आवास दिए जाने थे। काफी लंबे समय से इन आवासों की प्रक्रिया रुकी हुई चल रही थी। एक बार जांच पूरी होने के बाद पात्रों की दोबारा जांच भी कराई गई। पहले चरण में 295 और द्वितीय चरण में 224 लाभार्थियों के खाते में 50 हजार रुपये की किस्त भेज दी गई है, लेकिन अभी भी अधिकारी लक्ष्य से काफी दूर हैं। कई लोगों ने तो आवासों का निर्माण कार्य भी शुरू नहीं किया है।
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