पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) का उपयोग करने वाले हजारों उपभोक्ताओं के लिए दोहरी मुसीबत खड़ी हो गई है। एक तरफ केवाईसी न होने के कारण 50 हजार से अधिक उपभोक्ताओं की एलपीजी सिलिंडर बुकिंग अटक गई है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार ने नया आदेश जारी कर पीएनजी कनेक्शन होने पर एलपीजी सिलिंडर रखने को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है।
शहर में ग्रीन गैस कंपनी के करीब 70 हजार से अधिक घरों में पीएनजी के कनेक्शन हैं। एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन, आगरा संभाग के अध्यक्ष विपुल पुरोहित के अनुसार, पीएनजी कनेक्शन मिलने के बाद अधिकांश उपभोक्ताओं ने एलपीजी की सुध नहीं ली और न ही केवाईसी कराई। अब जब गैस की किल्लत या तकनीकी कारणों से सिलिंडर की जरूरत पड़ रही है, तो सॉफ्टवेयर अपडेट और केवाईसी की कमी के कारण बुकिंग नहीं हो पा रही है।
ग्रीन गैस की लापरवाही और सरेंडर का पेंच
आरोप है कि ग्रीन गैस कंपनी ने कनेक्शन देते समय एलपीजी वितरकों से न तो एनओसी ली और न ही उपभोक्ताओं के पुराने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कराए। बिना सरेंडर कराए ही 70 हजार कनेक्शन बांट दिए गए। अब केंद्र सरकार के नए संशोधन के बाद ये सभी उपभोक्ता कानूनी पेचीदगियों में फंस गए हैं।
नया कानून: पीएनजी है तो एलपीजी रखना अब अपराध
पेट्रोलियम मंत्रालय ने 14 मार्च को तरलीकृत पेट्रोलियम गैस आपूर्ति और वितरण का विनियमन संशोधन आदेश, 2026 अधिसूचित किया है।
दोहरा कनेक्शन प्रतिबंधित: जिस व्यक्ति के पास पीएनजी कनेक्शन है, वह अब घरेलू एलपीजी कनेक्शन रखने का पात्र नहीं होगा।
पीएनजी उपभोक्ता सरकारी तेल कंपनियों या वितरकों से एलपीजी सिलिंडर की रिफिल नहीं ले सकेंगे।
जिनके पास दोनों कनेक्शन हैं, उन्हें तत्काल अपना घरेलू एलपीजी कनेक्शन वापस (सरेंडर) करना होगा।
भविष्य में पीएनजी धारक कोई भी व्यक्ति नया एलपीजी कनेक्शन प्राप्त नहीं कर पाएगा।
तेल कंपनियों और वितरकों पर होगी कार्रवाई
सरकार ने तेल कंपनियों के लिए इसे निषिद्ध कार्यकलाप की श्रेणी में डाल दिया है। यदि कोई कंपनी या वितरक पीएनजी धारक को सिलिंडर सप्लाई करता है, तो उसके विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह नियम 14 मार्च से पूरे देश में प्रभावी हो गया है।