साल 2002 में एएसआई के तत्कालीन अधीक्षण पुरातत्वविद केके मुहम्मद ने इसकी मरम्मत के लिए अडॉप्ट हेरिटेज स्कीम में रखा था। लेकिन, उनके तबादले के बाद इसका संरक्षण ही नहीं किया गया। 22 साल पहले यहां तत्कालीन संरक्षण सहायक डॉ. आरके दीक्षित ने निरीक्षण किया था। उन्होंने इसके संरक्षण के लिए होने वाले काम का ब्योरा भी दिया था।
विरासत सहेजने की है जरूरत
एएसआई के पूर्व पुरातत्वविद डॉ. आरके दीक्षित के मुताबिक धरोहरों को सहेजने की जरूरत है। बेशक यह इमारत संरक्षित नहीं थी, लेकिन लोदी काल की वास्तुकला को समझने और मुगल काल में हुए बदलाव को जानने के लिए जरूरी थी। आगरा अप्रूव्ड गाइड एसोसिएशन अध्यक्ष शमशुद्दीन के मुताबिक लोदी काल की मस्जिद का गिरना बेहद चिंताजनक है। नई पीढ़ी को इतिहास, वास्तुकला समझने के लिए ऐसी धरोहरों की जरूरत है।