मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने कहा कि सूचना अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत राज्य में करीब 50 हजार अपील और शिकायतें लंबित चल रही हैं। वर्ष 2015-16 में करीब 34 हजार अपील और शिकायतें आई थीं। करीब 37 हजार का निपटारा किया गया है। कोशिश होगी कि लंबित प्रकरणों को जल्द निपटा लिया जाए। वह सोमवार को कमिश्नरी में आगरा मंडल के जन सूचना अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन के बाद मीडिया से मुखातिब हुए।
एक सवाल के जवाब में जावेद उस्मानी ने कहा कि यह सही कि जिन अधिकारियों पर अर्थ दंड अधिरोपित होता है उसकी वसूली के लिए आयोग के पास कोई व्यवस्था नहीं है। अब शासन की सहमति से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में मानीटरिंग सेल बनाई गई है, जो अर्थ दंड मामलों की मानीटरिंग करेगी। इस अवसर पर राज्य सूचना आयुक्त गजेंद्र यादव, कमिश्नर चंद्रकांत, जिलाधिकारी पंकज कुमार आदि मौजूद रहे।
नियमावली के लिए प्रशिक्षण
जावेद उस्मानी ने कहा कि सरकार ने जन सूचना अधिकार नियमावली बनाई है। इसलिए प्रदेश के सभी 18 हजार जन सूचना अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। लखनऊ, वाराणसी, मेरठ और अलीगढ़ के बाद अब आगरा मंडल के लिए यह कार्यक्रम 30 जून तक चलेगा। इसके लिए केंद्र सरकार 53 लाख और प्रदेश सरकार ने 12 लाख रुपये का फंड जारी किया है।
आरटीआई का दुरुपयोग रोकने
को मुख्य आयुक्त ने दिए टिप्स
आरटीआई का दुरुपयोग रोकने के लिए आयोग अब प्रभावी कदम उठाने जा रहा है। इसके लिए नियमावली के तहत कार्यवाही होगी। कमिश्नरी में मुख्य सूचना आयुक्त आयुक्त जावेद उस्मानी ने आगरा मंडल के अधिकारियों को इसके टिप्स भी दिए।
उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के विशेषज्ञों ने सरकारी की नियमावली की एक-एक धारा को पावर प्रेजेंटेशन के जरिए समझाया। बताया कि ऐसे मामले आते हैं, जिनकी सूचना ग्राम पंचायत स्तर से मिल सकती है, लेकिन आवेदनकर्ता डीएम, कमिश्नर या शासन से जानकारी मांगता है। दूसरा कुछ आवेदनकर्ता एक आवेदन पर कई विभागों को समेट कर सूचना मांगते हैं। इस पर जावेद उस्मानी साफ किया है कि मल्टीपल विभागों की सूचना मांगी जाती है तो एक मुख्य सूचना को छोड़कर शेष मामलों में संबंधित विभागों से सूचना मांगने का सुझाव देकर आवेदन वापस किया जाए। थर्ड पार्टी की सूचना के संबंध में यदि ऐसा लगता है कि सूचना नहीं दी जा सकती तो उसे वापस कर सकते हैं। यदि आवेदक यह सिद्ध कर देता है कि यह लोकहित की सूचना है तो उस मामले में थर्ड पार्टी को नोटिस जारी कर उसकी सहमति लेनी होगी।