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मुगलिया वैभव को बयां करेगा चौथा संग्रहालय

Fri, 04 Sep 2015 02:33 AM IST
अमित कुलश्रेष्ठ
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मुगल काल की राजधानी आगरा में मुगलिया वैभव से रू-ब-रू कराने के लिए राज्य सरकार 129 करोड़ रुपये की लागत से चौथा संग्रहालय बनवाएगी। ताजमहल से महज एक किमी दूर 5.9 एक ड़ जमीन पर  प्रस्तावित संग्रहालय का डिजायन तैयार हो चुका है। इसकेलिए ब्रिटेन, जर्मनी, टर्की, उज्बेक एक्सपर्ट की मदद ली जाएगी। इसमें प्रदर्शित कलाकृतियां कहां से आएंगी, यह तलाश बाकी है। संग्रहालय के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली स्टेट लेवल कमेटी मानिटरिंग करेगी।
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मुगलिया म्यूजियम के लिए राज्य सरकार ने 129.66 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं तो वहीं आगरा विकास प्राधिकरण बोर्ड बैठक में ताजमहल से एक किमी दूर विद्युत विभाग की 11.38 एकड़ जमीन में से 5.9 एकड़ जमीन म्यूजियम को ट्रांसफर करने का प्रस्ताव भी पास हो गया। म्यूजियम के दो मंजिला भवन में 16,344 वर्ग मीटर जगह होगी, वहीं एक बड़ा आडिटोरियम भी होगा। राजकीय निर्माण निगम इस म्यूजियम का काम जल्द शुरू करने वाला है।
यूपी टूरिज्म के क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी दिनेश कुमार के मुताबिक म्यूजियम के संचालन के लिए समिति बनेगी, जिसमें नेशनल और इंटरनेशनल आर्किटेक्ट, म्यूजोलोजिस्ट और मुगलिया इतिहास से जुड़े एक्सपर्ट शामिल किए जाएंगे। उनकेसुझाव पर ही कलाकृतियां और मुगल दौर की वस्तुएं प्रदर्शित की जाएंगी।
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तीन संग्रहालयों में वैभव नहीं दिखता
आगरा में फिलहाल ताजमहल के अंदर और फतेहपुर सीकरी व पालीवाल पार्क में सिटी संग्रहालय हैं। अब चौथे संग्रहालय की तैयारी है, लेकिन पहले से मौजूद तीनों संग्रहालयों में प्रदर्शित करने के लिए कलाकृतियां और मुगलिया वस्तुएं ही नहीं है। एएसआई ताजमहल के लिए दिल्ली के हुमायूं टूम और लाल किले में मौजूद म्यूजियम से सामान मंगवा रहा है। अब ऐसे में सवाल राज्य सरकार के प्रस्तावित म्यूजियम पर है कि यहां प्रदर्शित करने के लिए कलाकृतियां, पांडुलिपियां, शस्त्र, पेंटिंग आदि कहां से लाई जाएंगी।
ताज में 1982 से है संग्रहालय, दर्शक कम
ताजमहल में 1982 से पश्चिमी नौबतखाना (जलमहल) में संग्रहालय है। इसमें 121 पुरावशेष प्रदर्शित किए गए हैं। इसमें मुगलिया शस्त्र, ताजमहल का नक्शा, शाहजहां मुमताज की पेटिंग, सिक्के, राजा जयसिंह का फरमान आदि रखे गए हैं। ताज में बेशक हर साल 68 लाख सैलानी आते हों, लेकिन संग्रहालय देखने हर साल एक से डेढ़ लाख पर्यटक ही आते हैं।
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