थाना कुर्रा के सड़ तखरऊ की श्वेता मिश्रा ने वर्ष 2010 में विश्वविद्यालय से संबद्ध बाबूराम पीजी कॉलेज करहल से बीएससी की परीक्षा पास की थी। डिग्री के लिए उन्होंने 500 रुपये फीस ऑनलाइन जमा कर दी। इसके बाद भी उनको डिग्री नहीं मिली। उन्होंने कई बार विश्वविद्यालय में संपर्क किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद पीड़िता ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में 30 जुलाई 2024 को याचिका दायर करके डिग्री दिलाने की मांग की। जिसमें सुनवाई कर तथ्यों के आधार पर विश्वविद्यालय की कुलपति को दो महीने के अंदर पीड़िता को डिग्री देने का आदेश दिया है। डिग्री नहीं देने पर विश्वविद्यालय के कुलपति पर 46 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
वहीं, बीसीए के छात्र सुशील शर्मा की डिग्री एक महीने से प्रिंट होने के लिए अटकी है। अभी तक डिग्री प्रिंट नहीं हुई है। छात्र कई बार चक्कर लगा चुका है। एमए इकॉनोमिक्स के छात्र मनजीत सिंह को इंटरव्यू के लिए डिग्री की आवश्यकता है। इसके लिए वह करीब पांच महीनों से चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अभी तक डिग्री नहीं मिल पाई है।
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