गुरु नानक देव जी ने गंगा स्नान कर किए थे भगवान वराह के दर्शन
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कासगंज । पवित्र सोरों तीर्थ में तमाम महापुरुषों का आगमन हुआ है सिक्खों के प्रथम गुरु नानक देव महाराज का आगमन 1508 में सोरों तीर्थ में हुआ था । उन्होंने यहां प्रवास करते हुये लोगों को प्रभु भक्ति और मानवता का संदेश दिया। गुरु नानक देव ने यहां प्रवास के दौरान प्रतिदिन गंगा स्नान किया और भगवान बराह के दर्शन भी किए । हिंदू धर्म की रक्षा के लिए उनके संघर्ष की गाथा हर जुबान पर है उन्होंने मुगल सेना को पराजित कर हिंदू धर्म की रक्षा की । सोरों प्रवास के दौरान नानकदेव जी ने इस तीर्थ के पुरोहित को हस्त लेख भेंट किया जो आज भी गुरुद्वारा छैवीं पातशाही में सुशोभित है ।
सोरों के गुरुद्वारे में उनकी हस्तलेख व स्मृतियां आज भी बनी हुई हैं, गुरुद्वारे की दीवारों पर भी उनके आगमन का ब्यौरा अंकित है । सिक्ख धर्म के लोगों के बीच यह गुरुद्वारा काफी पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है, वहीं तीर्थ नगरी पहुंचने वाले अन्य तीर्थ पर्यटक भी यहां पहुंचकर में गुरुद्वारे मत्था टेकते हैं । गुरुनानक जयंती के मौके पर गुरुद्वारा प्रकाश पर्व के लिये सजाया जाता हैं यहां सतनाम कीर्तन व अन्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है । गुरुद्वारे के सेवादार राजेश कौर का कहना है कि यह गुरु नानक देव के आगमन और प्रवास से यह स्थान पवित्र हुआ है लोगों की गुरुद्वारे को लेकर श्रद्धा है। वहीं तीर्थ नगरी के साहित्यकार डॉ. राधा कृष्ण दीक्षित का कहना है कि इस तीर्थनगरी में संतों का आगमन प्राचीन समय से होता आया है गुरुनानक देव का आगमन और प्रवास यहां रहा, उन्होंने लोगों को मानवता और प्रेम का संदेश दिया। छठवे गुरु गुरु हरगोविंद सिंह जी भी सोरों आए थे।
गुरुनानक जयंती आज, सजे गुरुद्वारे
कासगंज। गुरुनानक जयंती पर्व शुक्रवार को मनाया जाएगा। पर्व को लेकर समाज के लोगों में उत्साह है। पूर्व संध्या से ही गुरुद्वारे सज गए। लोगों ने गुरुद्वारे के अलावा अपने घरों पर भी कार्यक्रम के आयोजन की तैयारियां की हैं। ग्रंथी प्रेम सिंह ने बताया कि सुबह साढ़े 9 बजे निशान साहिब की सेवा होगी, सुबह साढ़े 10 बजे सहज पाठ का समापन होगा, साढ़े 11 बजे से 2 बजे तक शबद कीर्तन आयोजित होंगे। इसके बाद अरदास व लंगर कार्यक्रम संपन्न कराए जाएंगे।