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जलस्तर तो हुआ कम पर दुश्वा रयां बरकरार

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कासगंज। बाढ़ प्रभावित इलाकों में मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं। जलस्तर में पांच सेंटीमीटर की कमी आई है, लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति जस की तस है। ग्रामीणों के सामने तरह-तरह की परेशानियां हैं। यहां तक की प्रभावित क्षेत्रों में मुस्लिम समाज के लोग ईद का त्योहार भी सही तरीके से नहीं मना सके। पर्व की औपचारिकताएं पूरी की गई। आगामी समय में गंगा के जलस्तर में और कमी के संकेत हैं, लेकिन जब तक गांव में भरे बाढ़ के पानी की निकासी नहीं होगी तब तक ग्रामीणों की दुश्वारियां कम नहीं होंगी। लंबे समय तक बाढ़ का प्रभाव रहने के कारण प्रभावित इलाकों में संक्रामक रोग के फैलने का खतरा है।


एक अगस्त से 25 गांव की आबादी के सामने बाढ़ का संकट है। बाढ़ ने न केवल फसलों को बर्बाद किया है अपितु लोगों का जनजीवन भी बेपटरी कर दिया है। सुबह से लेकर शाम तक प्रभावित इलाके के लोग बाढ़ से बचाव में लगे रहते हैं। ईद पर मुस्लिम समाज के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लोगों ने जैसे तैसे पर्व मनाया। बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों के सामने अब रक्षाबंधन के त्योहार मनाने का संकट है।
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इधर, गंगा के जलस्तर में पांच सेंटीमीटर की कमी आने के कारण जलस्तर 163.50 मीटर के निशान पर पहुंचा है। मंगलवार को जलस्तर पांच सेंटीमीटर अधिक था। हरिद्वार, बिजनौर और नरौरा से भी डिस्चार्ज कम होने पर आगामी समय में जलस्तर कम होने का अनुमान है। कादरगंज इलाके में गंगा की धार कटान भी करने लगी है। कटान के कारण मेहोल सहित अन्य बांधों को खतरा है। हालांकि सिंचाई विभाग इस पर ध्यान केंद्रित किए है।

डिस्चार्ज-
नरौरा- 117638 क्यूसेक
बिजनौर- 85667 क्यूसेक
हरिद्वार- 51054 क्यूसेक
कछला गेज- 163.50 मीटर के निशान पर


गंगा के जलस्तर में कमी आई है। हरिद्वार और नरौरा से भी पानी का डिस्चार्ज कम हुआ है। इससे जलस्तर में और कमी होने की उम्मीद है।
एके सिंह, सहायक बाढ़ प्रभारी।
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