एटा। मानव रहित क्रॉसिंग पर हादसों के बाद भी रेलवे विभाग नहीं चेत रहा। एटा-बरहन के बीच संचालित 12 से अधिक क्रॉसिंग का समाधान नहीं हो रहा। विगत वर्षों में हुए हादसों में जहां लाखों का नुकसान हुआ वहीं कई जानें भी गई हैं।
गुरुवार को कुशीनगर में हुए हादसे के बाद जिले में एक बार फिर रेलवे अव्यवस्थाओं पर बहस छिड़ गई है। लोगों में असुरक्षा की भावना है। वहीं, विभाग के प्रति आक्रोश बढ़ रहा है। यहां न तो गेट ही बनवाए जा रहे हैं और न ही कोई चौकीदार यहां निगरानी करता है। एटा बरहन के मध्य 23 मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग हैं।
आलम यह है कि मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर सुरक्षा बंदोबस्त नहीं होने से आए दिन हादसे होते हैं। गांव बारथर जाने वाले मार्ग के बीच क्रासिंग पर कोई फाटक नहीं लगा है। यहां महज दो-तीन पिलर लगाकर कोरम पूरा कर दिया गया है। इसके साथ ही आगरा रोड पर बावसा के पास मानव रहित क्रासिंग पर पीडब्ल्यूडी ने सड़क बना दी है। हालांकि रेलवे प्रशासन ने इसे लेकर डीएम से शिकायत भी की है। मगर अब तक सड़क मार्ग को खत्म नहीं किया गया है।
ये हुए हादसे
टूंडला-एटा रेलमार्ग पर 23 फरवरी 2014 को टूंडला से एटा आ रही पैसेंजर ट्रेन की चपेट में आए दूध कैंटर के टुकड़े-टुकड़े हो गए थे। चार लोग घायल हो गए थे, तीन की हालत गंभीर होने पर आगरा रेफर कर दिया था। फरवरी 2012 में भी ऐसे ही हादसे में पैसेंजर ट्रेन ने ट्रैक्टर के दो टुकड़े कर दिए थे, जिसमें झब्बू निवासी नगला भगतुआ तथा जुगेंद्र सिंह निवासी कुसवा गंभीर रूप से घायल हुए थे।
लोग कर रहे मांग
जिले के एटा-टूंडला रेल मार्ग पर बनी मानव रहित क्रासिंग को लेेकर काफी समय से लोग यहां फाटक की मांग करते चले आ रहे हैं, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई।