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मांस-मदिरा से पितृपक्ष में बनाएं दूरी

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हर हर गंगे ... गंगा घाटों पर गूंजें गंगा मैया के जयकारें - फोटो : अमर उजाला
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एटा। पितृपक्ष आज से शुरू हो रहे हैं। 20 सितंबर तक चलने वाले पितृपक्ष को लेकर तैयारियां अपने अंतिम दौर में हैं। मान्यता है कि सच्चे मन, धन और श्रद्धा से किया जाने वाला पितृ कर्म वंश को खुशहाली देता है। इस बार चतुर्दशी और अमावस्या का श्राद्ध 19 सितंबर को किया जाएगा। वहीं 20 सितंबर को गंगा घाटों पर स्नान, दान और विसर्जन किया जाएगा। शास्त्रों के मुताबिक इन दिनों घरों में प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा, मालिश और शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। वहीं बुधवार से 15 दिनों के लिए मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। श्राद्ध पक्ष को लेकर पूर्वजों को याद कर तर्पण के लिए तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। पिंडदान के साथ ब्राह्मणों को भोजन के लिए निमंत्रण भेजे जा रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण उपाध्याय बताते हैं कि छह सितंबर को पितृ पक्ष की प्रतिपदा 12 बजकर 19 बजे से लगेगी। इसके साथ श्राद्ध और तर्पण शुरू हो जाएंगे। इस बार विशेष संयोग है कि पितृपक्ष बुधवार से शुरू होकर बुधवार को ही समाप्त होगा। 14 सितंबर को मातृ नवमी का श्राद्ध होगा। उन्होंने बताया कि ब्रह्म पुराण में पितृ पक्ष पूर्वजों के दिन माने गए हैं। इन दिनों में पूर्वज धरती पर आते हैं। पितृ पक्ष में प्रतिदिन सूर्योदय के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके जल में काले तिल, लाल-सफेद फूल और कुश डालकर पितरों को अर्पित करें। मकान की छत पर कौवों के लिए जल भरकर रखें।
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बाजारों में पसरेगा सन्नाटा
पितृपक्ष के दौरान बाजार में सन्नाटा रहेगा। दरअसल, पितृ पक्ष में अधिकांश लोग नए सामान की खरीदारी से बचते हैं। दुकानदार राजेश कुमार ने बताया कि 15 दिन तक ऑफ सीजन रहता है। नवरात्र में लोग खरीदारी करने निकलेंगे। दुकानदार अजय कहते हैं कि पितृपक्ष में श्राद्ध होने के चलते मांगलिक कार्य नहीं होते है। ऐेसे में लोग नई वस्तुएं खरीदने से बचते हैं। अब तो 15 दिन बाद बाजार में रौनक लौटेगी।
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इस माह नहीं कर सकेंगे गृह प्रवेश
यदि आप गृह प्रवेश का विचार कर रहे हैं, तो रुक जाइए। इस पूरे माह गृह प्रवेश का कोई शुभ मुहूर्त नहीं है। पंडित अरुण कुमार बताते हैं कि सितंबर माह में विवाह, गौना, मुंडन, यज्ञोपवीत और गृह प्रवेश का कोई शुभ मुहूर्त नहीं है।
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इन बातों का रखें ध्यान
- पितृ पक्ष मेें जौ, गेहूं, धान, तिल, मूंग, चना, गाय का घी, वस्त्र, नमक, सोना और चांदी का दान महादान माना गया है।
- महिलाएं श्राद्ध, पंडितों को भोज कराते समय बाल खुले नहीं रखें।
- अपने पितरों को जल अर्पण कर श्राद्ध करने वाले पुरुष पान मसाला, तंबाकू, शराब, मांस का सेवन नहीं करें।
- जिन पूर्वजों की मृत्यु का दिन, तिथि नहीं पता हो, उनका श्राद्ध कर्म अमावस्या तिथि को किया जा सकता है।
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ये तिथियां रखें याद
छह सितंबर- पितृ पक्ष प्रतिपदा का श्राद्ध
14 सितंबर- मातृ नवमी
20 सितंबर- पितृ अमावस्या
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