सोरों (कासगंज)।
तीर्थनगरी में महर्षि कपिल की आज्ञा से भागीरथ ने गंगा के अवतरण के लिए यहां एक गुफा में तप किया। उन्होंने यह तप महर्षि कपिल की गुफा में बैठकर किया। तब से यह भागीरथी गुफा के नाम से प्रसिद्ध है।
भागीरथ ने इस स्थान पर श्रमसाध्य तपस्या करके ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया और गंगा का अवतरण हुआ। उन्होंने गंगा के वेग को संभालने हेतु भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यह तप किया। इसी तप के प्रताप से यहां गंगा की धार प्रकट हुई। जिसे अब बूढ़ी गंगा कहा जाता है। बताया जाता है कि राजा सगर के अश्वमेघ यज्ञ में देवराज इंद्र ने विघ्न डालने के उद्देश्य से घोड़े चुरा लिए। यह घोड़े महर्षि कपिल के आश्रम राजा सगर के पुत्रों को मिले। पुत्रों ने महर्षि कपिल के साथ अभद्र व्यवहार कर दिया। अभद्र व्यवहार से दुखी महर्षि कपिल ने महाराज सगर के 60 हजार पुत्रों को भस्म होने का श्राप दे दिया। इससे राजा सगर के 60 हजार पुत्र भस्म हो गए। इसके पश्चात महाराजा सगर की पत्नी ने अपने पुत्रों की सदगति हेतु तप किया था, लेकिन तप सफल नहीं हुआ। जनश्रुति है कि इस गुफा का दूसरा छोर काशी में निकलता है, लेकिन इसकी पौराणिक पुष्टि नहीं है। कई बार लोगों ने इस गुफा में जाने का प्रयास किया है, लेकिन कुछ दूरी के बाद ही इस सक्रिय गुफा में ऑक्सीजन की कमी के कारण लोग आगे नहीं बढ़ पाते। भागीरथी की इस तप स्थली पर तमाम अन्य लोगों ने भी तप साधना की है। आज भी यह स्थान लोगों के बीच श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस गुफा पर पहुंच कर पूजा अर्चना करते हैं।
क्या कहते हैं तीर्थनगरी सोरों के लोग
सोरों सूकर क्षेत्र भगवान विष्णु की तृतीय अवतार स्थली है। सरकारों के द्वारा की जा रही इसकी उपेक्षा सरकारों के अदूरदर्शी नजरिए का परिचायक है। श्रद्धा के इस अद्भुत स्थान को तीर्थ स्थल घोषित किया जाना चाहिए। महंत विदेहानंद गिरी, वराह मंदिर
भागीरथी गुफा काफी पौराणिक है। गुफा के पास ही बूढ़ी गंगा का प्रवाह था। यह स्थान तप साधना के लिए प्राचीन समय से ही जाना गया है। यहां तमाम संत विद्वानों ने भी तप किया है। तीर्थ स्थल बनने के बाद लोगों को इन पौराणिक धरोहरों के बारे में जानकारी हो सकेगी। देवेंद्र कुमार दुबे, प्रधानाचार्य संत तुलसीदास इंटर कॉलेज
- सोरों सूकर क्षेत्र पौराणिक महत्व का प्राचीन समय से तीर्थ स्थान है। आज तक सरकारों ने कभी इस स्थान को तीर्थस्थल का दर्जा नहीं दिया। यह बड़ी विडंबना है। अब तीर्थ नगरी के बाशिंदे इस हक को पाने के लिए आगे बढ़ेंगे। सतीश भारद्वाज, अध्यक्ष गंगा भक्त समिति
उत्तर भारत का यह प्रमुख तीर्थ है। वराह मंदिर, भागीरथी गुफा सहित अन्य पौराणिक और प्राचीन स्थान यहां मौजूद हैं। इस पवित्र सूकर क्षेत्र की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं होती। सरकार को चाहिए कि सूकर क्षेत्र को तीर्थ नगरी घोषित किया जाए। डा. रविकांत गुप्ता चिकित्सक