पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का बटेश्वर और आगरा की गली-गली घूमे, लेकिन ताजमहल वह एक बार ही आए। 41 साल पहले 1977 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री लियोनार्ड जेम्स केलघन के स्वागत के लिए बतौर विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को ताजमहल भेजा गया था। ताजमहल दिखाने के बाद न तो अटल ने और न ही ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने ताजमहल के लिए कोई शब्द लिखा। इन दोनों ने एक ही पेज पर अपने हस्ताक्षर किए। एएसआई अधिकारी ने ताज पर कुछ लिखने का आग्रह किया तो उन्होंने कहा कि ताज पर उनकी लिखी हुई कविता पढ़ लेना।
भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अब यादें शेष हैं। एएसआई के वरिष्ठ संरक्षण सहायक रहे डॉ. आरके दीक्षित याद करते हैं कि 1977 में विदेश मंत्री रहते हुए अटलजी ब्रिटिश पीएम के स्वागत के लिए आए थे। गेट पर उन्होंने पीले गुलाब को पीएम के कोट में लगाया। उन्होंने अपने लिए नारंगी रंग का फूल चुना था। ब्रिटिश पीएम जेम्स केलघन केसाथ वह अंदर नहीं गए और बाहर रॉयल गेट पर ही रहे। इसके बाद प्रधानमंत्री के रूप में वह 15 जुलाई 2001 को पाकिस्तानी राष्ट्रपति रहे परवेज मुर्शरफ के साथ आगरा शिखर वार्ता के लिए आगरा आए थे, लेकिन तब भी वह ताजमहल नहीं गए, जबकि पाकिस्तानी राष्ट्रपति मुशर्रफ अपनी पत्नी के साथ ताजमहल गए थे।
हर एक के साथ खिंचवाया था ताज में फोटो
ब्रिटिश प्रधानमंत्री जेम्स केलघन के ताजमहल भ्रमण के दौरान तब विदेश मंत्री रहे अटल बिहारी ने अपने स्थानीय मित्रों और एएसआई अधिकारियों के साथ खूब फोटो खिंचवाए। ब्रिटिश पीएम एक घंटे अंदर रहे तो अटल उस समय रॉयल गेट पर कुर्सी पर ही बैठे रहे। इस दौरान ताजमहल में एएसआई के डॉ. आरके दीक्षित ने उनसे कई बातें भी की और उनसे विजिटर बुक में हस्ताक्षर और क मेंट करने का आग्रह भी किया, लेकिन अटल ने केवल हस्ताक्षर किए और कहा कि ताजमहल पर उन्होंने कविता लिखी है, उसे पढ़ लेना।
जब रोया हिंदुस्तान सकल, तब बन पाया ताजमहल...
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी पहली कविता ही ताजमहल पर लिखी थी। उन्होंने न तो शृंगार और न ही ताजमहल की खूबसूरती को शब्दों में उतारा। उन्होंने ताजमहल बनाने वाले मजदूरों की व्यथा को अपनी कविता में जगह दी और लिखा कि
यह ताजमहल, यह ताजमहल
यमुना की रोती धार विकल
कल कल चल चल
जब रोया हिंदुस्तान सकल
तब बन पाया ताजमहल
यह ताजमहल, यह ताजमहल