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सुहागनगरी में प्रतिदिन हो रहीं 40 से 50 मौत

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फिरोजाबाद। सुहागनगरी में मौतों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। लोग फेसबुक और व्हाट्सएप पर मेसेज पढ़ने से भी अब डरने लगे है। लगातार वायरल होते मेसेज को देखकर विगत कई दिनों से लोग सोशल मीडिया से किनारा करने लगे हैं। कई लोगों ने अपने फोन से व्हाट्सएप और फेसबुक तक को हटा दिया है।
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कोरोना सहित अन्य बीमारियों से पीड़ित 40 से 50 लोग प्रतिदिन दम तोड़ रहे हैं। जिले में हालात यह है कि श्मशान घाटों के अतिरिक्त यमुना किनारे भी शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। शव का अंतिम संस्कार करने के बाद लोग अस्थियां लेने भी श्मशान घाट नहीं पहुंच रहे है। साफ सफाई का जिम्मा संभालने वाले कर्मचारी लोगों को फोन कर अस्थियां ले जाने की गुहार लगा रहे हैं।
मना करने पर चिता की राख को जंगल में फेंका जा रहा है। छारबाग स्थित श्मशान घाट पर शनिवार सुबह एक के बाद एक पांच शवों का अंतिम संस्कार किया गया। शनिवार शाम करीब चार बजे तक सात शवों का अंतिम संस्कार छारबाग स्थित स्वार्गाश्रम पर हो चुका था। वहीं दो शवों का दाह संस्कार यमुना किनारे सोफीपुर के समीप किया गया। क्लब चौराहा स्थित श्मशान घाट पर दो शवों का दाह संस्कार दोपहर करीब 12 बजे तक किया गया था। यह स्थिति तीन श्मशान घाटों की है। वहीं शहरी क्षेत्र में कुल 15 और पूरे में 80 श्मशान घाट हैं।
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आम दिनों में जहां दो से तीन शव आते थे। हालांकि पिछले कई दिनों से दाह संस्कार के लिए लाए जाने वाले शवों की संख्या बढ़ गई है। शनिवार शाम चार बजे तक सात शवों का अंतिम संस्कार छारबाग श्मशान घाट पर किया गया और दो शवों का दाह संस्कार यमुना किनारे किया गया। शवों की संख्या बढ़ने के साथ ही दूर दराज से लकड़ी आदि मंगानी पड़ रही है।
दिनेश यादव लकड़ी विक्रेता, स्वर्गाश्रम शमशान घाट
प्रतिदिन सात से आठ चबूतरों की सफाई करनी पड़ रही है। लोग अस्थियां तक लेने नहीं आते है। फोन कर लोगों को बुलाना पड़ता है। फोन के बाद भी नहीं आने पर अस्थियों और राख को बोरे में बंद कर यमुना किनारे जंगल में फेंक दिया जाता है।
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सुनील कुमार, सफाई कर्मी, स्वर्गाश्रम श्मशान घाट
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