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17.50 लाख आबादी का जिम्मा संभाल रहे 40 चिकित्सक

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कासगंज। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं लचर हाल में हैं। इसका प्रमुख कारण है चिकित्सकों की कमी। जिले की 17.50 लाख की आबादी के स्वास्थ्य का जिम्मा संभालने के लिए जिले और जिला अस्पताल में कुल 40 चिकित्सक ही तैनात हैं। यदि जिले की आबादी से चिकित्सकों की तैनाती की तुलना की जाए तो 44000 की आबादी पर एक चिकित्सक की तैनाती है।
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जिले में पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 29 ग्रामीण स्तरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसके अलावा जिला संयुक्त अस्पताल है। चिकित्सकों की कमी के कारण जो तैनात डाक्टर हैं उन पर कार्य का अधिक बोझ रहता है और वे समुचित तरीके से मरीजों का उपचार नहीं कर पाते। सभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की ओपीडी में मरीजों की काफी भीड़ रहती है, जिससे अव्यवस्था का आलम दिखाई देता है। यदि संसाधनों की बात करें तो जिला अस्पताल में वेंटीलेटर, सिटी स्कैनिंग, अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी सहित तमाम संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन इन संसाधनों को संचालित करने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। आम लोगों को इलाज के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है।
ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं है चिकित्सकों की तैनाती
कासगंज। जिले में 29 ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं, लेकिन इन केंद्रों पर चिकित्सकों की तैनाती नहीं है, जिसके कारण ज्यादातर स्वास्थ्य केंद्र बंद रहते हैं। कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर फार्मासिस्ट तैनात किए गए हैं। जो प्रतिदिन केंद्र संचालित नहीं कर पाते। इससे ग्रामीणों को साधारण इलाज के लिए भी इधर-उधर भटकना पड़ता है।
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जिला अस्पताल में 34 पद, छह हैं तैनात
कासगंज। जिले में कोरोना काल में भी स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं हो सकीं। शासन ने ऑक्सीजन की व्यवस्था के लिए प्लांट स्थापित कराए। अन्य संसाधन भी उपलब्ध कराए, लेकिन मांग के अनुरूप चिकित्सकों की तैनाती नहीं की गई। जिले में चिकित्सकों 93 पद हैं, जिनमें 34 चिकित्सक ही तैनात हैं। जबकि जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 34 पद हैं जिसमें केवल 6 चिकित्सकों की ही तैनाती है।
- जिले में चिकित्सा संसाधनों का बेहतर प्रयोग किया जा रहा है। चिकित्सकों की कमी काफी समय से है। चिकित्सकों की तैनाती के लिए शासन से मांग की गई है। स्मरण पत्र भी भेजे हैं, लेकिन अभी चिकित्सकों को तैनाती नहीं मिली है। - डॉ. अनिल कुमार, सीएमओ।
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