विरोध की चिंगारी में शराब विक्रेताओं का कारोबार को पूरी तरह से झुलस गया है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 35 लाइसेंसियों ने अपना लाइसेंस सरेंडर कर दिया है। इनका कहना है कि जब तक विभाग नई दुकान उपलब्ध नहीं कराता, ठेका खोल पाना मुश्किल है। इनके अलावा लगभग सौ दुकानों को भी अब तक नई जगह नहीं मिल पाई है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक अप्रैल से जिले में हाईवे किनारे की 179 दुकानें बंद हो गईं। इसके बाद अधिकांश ने अपने ही क्षेत्र में हाईवे किनारे से 500 मीटर अंदर नई दुकान तलाश ली। आबादी वाले क्षेत्रों में शराब की दुकान खुलने का क्षेत्रीय लोगों ने विरोध कर दिया। एक अप्रैल से लगभग हर रोज किसी न किसी शराब की दुकान पर तोड़फोड़ और लूटपाट हो रही है। इससे शराब विक्रेता दहशत में आ गए हैं। उन्हें हजारों रुपये का नुकसान तो हुआ ही है। इन हालातों में नई जगह पर उनकी दुकानें नहीं खुल पा रही। ऐसे में 35 शराब विक्रेताओं ने लाइसेंस ही सरेंडर कर दिए हैं। इन सभी ने आबकारी विभाग से अपील की है कि वही अब जगह उपलब्ध कराए। इसके अलावा लगभग सौ और ऐसे ठेके हैं जो अब तक नहीं खुल पा रहे हैं। इनकी मुसीबत क्षेत्रीय लोगों के साथ-साथ नए आदेश ने बढ़ा दी है। इसके तहत पंजीकृत धार्मिक स्थल, स्कूल और अस्पताल के 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकान नहीं खोली जा सकती। ऐसे में नई दुकान ढूंढने में मुश्किल आ रही है, जिन्होंने नई जगह तलाश ली है वहां क्षेत्रीय लोग उनकी दुकान खुलने नहीं दे रहे।
विरोध के बाद 35 शराब विक्रेताओं ने लाइसेंस सरेंडर किए हैं। इसके अलावा लगभग सौ और लाइसेंसधारकों को नई दुकान खोलने के लिए जगह नहीं मिल पा रही है।
- एलबी यादव,
जिला आबकारी अधिकारी