समाज के उच्चवर्ग में उन युवा महिलाओं की संख्या बढ़ रही है जिनके लिए ‘पवित्रता’ जैसी सोच गुजरे जमाने की बात है। ये युवतियां शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाना गुनाह नहीं मानतीं। हालांकि इतने खुले विचारों वाली होने के बावजूद ‘पुरुष सोच’ का भय उन पर हावी है। डर इस बात का, कहीं सुहागसेज में आशंकाओं के कांटे न उग आएं। जीवन भर की इस टीस से बचने के लिए 28 से 32 फीसदी युवतियां वर्जिनिटी (कौमार्य) वापस पाने के लिए सर्जरी का सहारा ले रही हैं। इनमें सर्वाधिक कॉलेज जाने वाली छात्राएं और कामकाजी युवतियां सर्वाधिक हैं जिनकी उम्र 20 से 26 साल होती है। सर्जरी की स्वीकार्यता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि इस से कोई नुकसान नहीं होता।
यह चलन सिर्फ अविवाहित युवतियों में ही हो ऐसा भी नहीं है। शादीशुदा भी इस सर्जरी के लिए पहुंचती हैं। हालांकि इनकी संख्या अविवाहिताओं से कम है। कलाकृति मैदान में चल रही 59वीं ऑल इंडिया कांग्रेस ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गाइनेकोलॉजी (आईकोग-2016) के चौथे दिन पुणे की वर्जिनिटी सर्जरी स्पेशलिस्ट डा. ऋतु संतवानी ने इसका खुलासा किया। उन्होंने बताया कि बीते 10 वर्षों मेें सर्जरी कराने वाली युवतियों में 65 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। पहले यह चलन मेट्रो सिटीज की महिलाओं तक सीमित था। अब तो आगरा समेत अन्य महानगरों की युवतियां भी यह सर्जरी कराने आ रही हैं। इनमें 90 फीसदी हाई सोसाइटी की अथवा कामकाजी होती हैं। ऐसे ‘मरीजों’ की पहचान गुप्त रखी जाती है।
सर्जन तक पहुंच इंटरनेट के जरिए
डा. संतवानी बताती हैं कि उनके पास देशभर से युवतियां आती हैं। पूछने पर पता चला कि वर्जिनिटी सर्जरी बारे में उन्होंने इंटरनेट के जरिए जानकारी हासिल की थी। शादी तय होते ही युवतियां सर्जरी के लिए कांटेक्ट करती हैं। इनमें आगरा व आसपास के जिलों की भी युवतियां होती हैं। तीमारदार के रूप में वे किसी दोस्त को साथ लाती हैं।
30-35 मिनट लगते हैं आपरेशन में
वर्जिनिटी सर्जरी में 30-35 मिनट लगते हैं। इसमें रि-कंस्ट्रक्शन के जरिए ‘मरीजों’ को कौमार्यावस्था जैसी स्थिति प्रदान की जाती है। दो-तीन घंटे बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाता है। इतना ही नहीं, इस सर्जरी के जरिए साइकिलिंग, खेलकूद, दुर्घटना आदि के चलते भी क्षतिग्रस्त झिल्ली को पुन: प्राकृतिक रूप दिया जा सकता है।