सोरों (कासगंज)। मेला मार्गशीर्ष के कार्यक्रम की श्रंखला में शुक्रवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें देशभर के नामचीन कवियों ने जमकर लोगों को गुदगुदाया।
कार्यक्रम के शुभारंभ में कवित्री डा. रुचि चतुर्वेदी ने मां सरस्वती की वंदना की। कवि चेतन चर्चित ने ‘सब्र के बांध का कड़ा होना पड़ा, मजबूरियां ऐसे मोड़ पर ले आईं की वक्त से बढ़ा होना पड़ा।’ नोएडा से आईं कवित्री अनीता सिंह ने ‘कभी बेटी, कभी मां, कभी नारी में जीती हूं मैं रोज जिंदगी एक उधारी में जीती हूं रचना पढ़ी।’ कवि डा. अर्जुन सिसौदिया ने ‘अनुचित करनी पर मौन रहे, सबके सब दागी होते हैं।’ प्रस्तुति दी। सिकंदराराऊ से आए कवि डा. विष्णु सक्सेना ने ‘दिल बीमार सही हो वा दवाएं दे दे, मैं सबपे प्यार लुटाऊं वो दुआएं दे दे।’ रचना पढ़ी। कवि राजेंद्र मालवी ने ‘हम अपनी जिंदगी के अनुभव का इस तरह बखान करते हैं कि पहले जब बच्चे तो बाप से डरते थे आज बाप हैं तो बच्चों से डरते हैं।’ कवित्री सोनल जैन ने ‘नदी बह ले कहीं पर भी, समंदर से ही मिलती है, मगर मंजिल भी ये केवल मुकद्दर से ही मिलती है।’ हास्य कवि शशिकांत यादव ने जमकर ठहाके लगवाए। कवित्री अनीता सिंह, कवि अशोक भाटी ने भी रचनाएं पढ़ी। संचालन डा. राधा कृष्ण दीक्षित ने किया। आयोजक श्याम सुंदर गुप्ता ने सभी अतिथियों एवं कवियों का सम्मान किया। डीएम आरपी सिंह, एसपी अशोक कुमार शुक्ल, भाजपा बृज प्रदेश के अध्यक्ष रजनीकांत माहेश्वरी, पालिकाध्यक्ष मुन्नी देवी, भाजपा जिलाध्यक्ष पूर्णेंद्र सोलंकी, इओ संतराम सरोज, सरेश पटियात, उपेंद्र मिश्र एडवोकेट, डा. एलआर पल्लव, अखिलेश अग्रवाल, सतीश गुप्ता, दिवाकर सोनी, मनोज अग्रवाल, बीडी राना, नवल कुल्श्रेष्ठ, अमित मिश्र, आदित्य दुबे, मनोज भारद्वाज, महेश त्रिवेदी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।