जिले में गंगा का जलस्तर तो कम हुआ है। मीडियम फ्लड के हालात अब लो फ्लड में तब्दील हो गए हैं, लेकिन जिन गांव में गंगा की बाढ़ का पानी भरा हुआ है अभी उसकी निकासी नहीं हो पा रही है। इससे ग्रामीण इलाकों में समस्या बरकरार हैं। जलस्तर कम होने के साथ ही तटबंधों के कटने का खतरा बढ़ गया है। अब बांधों पर लगातार बाढ़ के पानी का जलभराव होने से बांधों की मिट्टी कटने का भी खतरा बन गया है।
गुरुवार को हरिद्वार से सुबह 45301 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज बना हुआ था। वहीं बिजनौर बैराज से 55998 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज था, लेकिन गुरुवार को नरौरा बैराज से लो फ्लड लेविल का 120863 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज बना हुआ था। कछला ब्रिज पर गंगा का जलस्तर गुरुवार को 163.5 के निशान पर था। गंगा के जलस्तर में 30 सेंटीमीटर की कमी आ चुकी है। जिले में मीडियम फ्लड से तो निजात मिलने के हालात बन रहे हैं, लेकिन लो फ्लड का प्रभाव अभी जिले में एक दिन और बरकरार रहने की उम्मीद है। 12 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। समसपुर नरदौली के ज्यादातर गांव के खेत खलियानों में बाढ़ का पानी कई कई फुट तक जमा है। फसलें डूबी हुई हैं।
किलौनी, किसौल और नगला ढाब में भी यही हालात बने हुए हैं। यहां आबादी तक बाढ़ के पानी की दस्तक जा पहुंची। जिससे लोगों को हर समय बाढ़ के पानी से गुजरना पड़ रहा है। वहीं पटियाली इलाके के मेहोल, कादरगंज इलाके में खेतों में गंगा का पानी है। लगातार जलभराव के कारण फसलों को क्षति का अनुमान लगाया जा रहा है।
घटते जलस्तर में सबसे ज्यादा कटान का खतरा बढ़ता है। गंगा का प्रभाव तेजी से आगे की ओर बढ़ता है जिससे तेज गति से गंगा के तटबंधों की जमीन कटने लगती है। असदगढ़ बांध के नजदीक ही गंगा कटान कर रही है। बांध कटने पर कई गांव में गंगा का पानी भरने की आशंका बनी हुई है। इन इलाकों के ग्रामीण बेहद चिंतित हैं और वे बांध पर निगरानी बनाए हैं। कादरगंज के असलम खां ने बताया कि सिंचाई विभाग ने कटान रोकने के कार्य किए हैं। वे अभी कारगर साबित नहीं हो रहे।
वहीं काली नदी का जलस्तर भी स्थिर बना हुआ है। काली नदी की बाढ़ के पानी की निकासी खेतों से नहीं हो पाई है। जिससे मक्का बाजरा आदि की फसलें बर्बाद हो रहीं हैं। काली नदी की धारा भी निरंतर कटान कर रही है। अहरौली की ग्राम प्रधान राजवती ने बताया कि काली नदी में उफान काफी वर्षों के बाद आया है।
डिस्चार्ज-
हरिद्वार बैराज से डिस्चार्ज- 45301 क्यूसेक
बिजनौर बैराज से डिस्चार्ज- 55998 क्यूसेक
नरौरा बैराज से डिस्चार्ज - 120863 क्यूसेक
कछला का जलस्तर- 163.45 मीटर के निशान पर।
- गंगा के जलस्तर में गिरावट आने पर कटान होता है। चूंकि कादरगंज क्षेत्र में पहले कटान हुआ था। जिसकी रोकथाम के लिए सिंचाई विभाग ने कटानरोधी कार्य किए। जलस्तर गिरने पर कटान न हो इस पर खास ध्यान रखा जा रहा है। सिंचाई विभाग को निरंतर निगरानी के निर्देश दिए हैं।
आरपी सिंह, जिलाधिकारी।