योगी जी यह आपदा ग्रस्त पिछड़ा जिला आपसे तमाम अपेक्षाएं रखता है। इस जिले में होने वाली प्राकृतिक आपदाएं अभिशाप बन चुकीं हैं। कभी गंगा के कहर का जिले के लोगों को सामना करना पड़ता है तो कभी भीषण अग्निकांडों का। गंगा क्षेत्र होने के कारण आए दिन जिले में बड़ी दुर्घटनाएं होतीं हैं, लेकिन लोगों को अपेक्षित चिकित्सा नहीं मिल पाती। इसका प्रमुख कारण चिकित्सकों की कम तैनाती है। आखिर ऐसे हालातों में लोग कैसे आपदाओं का सामना करें और कैसे अपने आप को बताएं।
जिले में आपदाओं से निपटने के लिए संसाधनों का बेहद अभाव है। गौर करने की बात तो यह है कि यहां करीब 25 वर्ष पूर्व अग्निशमन केंद्र स्थापित किया गया जो आज भी एक जर्जर हाल भवन में जिला मुख्यालय पर संचालित है। इतना समय बीतने के बाद भी अग्निशमन केंद्र का भवन मुख्यालय पर नहीं बन सका है। अग्निशमन विभाग के पास मात्र तीन दमकलें हैं। बड़ा क्षेत्रफल होने के कारण घटनाओं के दौरान समय से ये दमकलें नहीं पहुंच पातीं और बड़ी घटनाएं हो जातीं हैं।
जिला चिकित्सालय की बात करें तो जिले में 93 चिकित्सकों के पद हैं। इन पदों के सापेक्ष केवल 28 चिकित्सकों की ही तैनाती है। तमाम उपस्वास्थ्य केंद्र चिकित्सकों के अभाव में बंद पड़े हैं। जिला चिकित्सालय में केवल प्राथमिक उपचार की ही सुविधा है। प्राथमिक उपचार की ऐसी स्थिति में मिल पाता है। इन 28 चिकित्सकों में से 6 चिकित्सक स्वास्थ्य विभाग के अन्य पदों का कार्यभार देख रहे हैं। मानकों के अनुरूप निर्धारित दवाओं का भी टोटा रहता है। दुर्घटनाओं के मौके पर लोगों को समुचित इलाज नहीं मिल पाता जिससे असमय लोगों की मौत हो जाती है। आए दिन गंगा और नहरों में डूबने के बड़े हादसे होते हैं, लेकिन जिले में रिवर फ्लड की यूनिट नहीं है जो बेहद आवश्यक है। 2010 और 2011 की बाढ़ में कई लोगों की जानें गईं और करोड़ों की संपत्ति की क्षति हुई।
जिले को आपदा प्रबंधन के लिए पर्याप्त संसाधनों की आवश्यकता है। अग्निशमन, स्वास्थ्य विभाग को दुरुस्त किया जाना जरूरी है वहीं रिवर पुलिस की यूनिट भी जरूरी है। स्नान पर्वों पर बड़े हादसे होते हैं।