मैनपुरी। शहर के ईशन नदी तिराहे पर शुक्रवार को लोगों ने युवक की गोली मारकर हत्या करने के बाद जाम लगाकर हंगामा किया। शव को तीन घंटे तक रखकर लगाया गया। साथ ही आसपास की दुकानों को भी बंद कराया गया। परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने कोतवाली के दो सिपाहियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की है। इस बीच जाम खुलवाने के लिए पुलिस को लाठी भी फटकारनी पड़ी।
गांव रठेरा का रहने वाला संजीव कुमार (35) करीब 20 वर्ष से कोतवाली क्षेत्र के नगला रते में परिवार के साथ रह रहा था। वह कचहरी रोड पर पाल मार्केट में बाइक संभालने का काम करता था। गुरुवार को वह दुकान से घर चला गया तभी उसके मोबाइल पर किसी का फोन आया इसके बाद वह घर से नुमाइश जाने की बात कहकर निकल गया।
रात करीब पौने दस बजे बस स्टैंड के सामने उसकी बाइक सामने से आ रहे कोबरा मोबाइल बाइक से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि संजीव, कोबरा टीम के सिपाही सौरभ यादव और तेजप्रकाश घायल हो गए। पुलिस ने घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
गंभीर हालत को देखते हुए सिपाही सौरभ और संजीव को उपचार के लिए सैफई रेफर कर दिया गया। रास्ते में संजीव ने दम तोड़ दिया। परिवारीजन शव लेकर वापस आए और शुक्रवार सुबह करीब सात बजे ईशन नदी तिराहा पर शव रखकर जाम लगा दिया। परिजनों का आरोप था कि युवक को कोबरा पुलिस के सिपाहियों ने बाइक टकराने के बाद गोली मारी है।
जाम की सूचना पर कई थानों का फोर्स मौके पर पहुंच गया। जाम के दौरान भीड़ ने जमकर हंगामा किया। पुलिस और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। साथ ही क्षेत्रीय दुकानों को भी बंद करा दिया। मार्ग से गुजर रहे लोगों के साथ अभद्रता भी की गई। पुलिस ने लाठी चलाकर आक्रोशित भीड़ को खदेड़ा।
सूचना मिलने के बाद एएसपी ओमप्रकाश सिंह, एसडीएम अमित सिंह भी मौके पर पहुंचे। वहीं भाजपा के पूर्व विधायक अशोक चौहान पहुंचे। कई बार परिजनों से पोस्टमार्टम कराने को कहा गया, लेकिन वह तैयार नहीं हुए।
करीब तीन घंटा तक वहां जमकर हंगामा चलता रहा। एसडीम ने मृतक के परिवारीजनों को आर्थिक सहायता व दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई किए जाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद लोग शांत हुए। तीन घंटे बाद करीब दस बजे पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और जाम खुलवाया। मृतक के भाई की तहरीर पर सिपाही सौरभ और तेजप्रकाश के विरुद्ध हत्या का मामला दर्ज किया है।
घायल चीखता रहा, चिकित्सक लापरवाह बने रहे
मैनपुरी। घायल संजीव चीख-चीखकर कहता रहा कि उसे गोली मारी गई है, लेकिन न तो चिकित्सकों ने उसकी बात सुनी और न ही तैनात स्टाफ ने। वहीं गोली निकलने वाले स्थान को टांके लगाकर बंद भी कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान एक बार फिर स्वास्थ्यसेवाओं व कर्मियों की लापरवाही सामने आई है। अगर संजीव को गोली लगने का उपचार दिया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। यह पहला मौका नहीं, इससे पूर्व भी गांव हरचंदपुर निवासी एक महिला की मौत के बाद शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया था।