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आदेश का सम्मान, मगर धर्मस्थलों को मिले मान

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High Court - फोटो : amarujala
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एटा। हाइकोर्ट के धर्मस्थलों पर लाउडस्पीकर नहीं बजाने के निर्देश को लेकर हलचल मच गई है। धर्मगुरूओं ने एक ओर आदेश का सम्मान और स्वागत किया है। वहीं दूसरी ओर दबी जुबान से धर्म गुरू इबादत और पूजा-अर्चना को अनुमति के दायरे से बाहर रखने की बात कर रहे हैं। अनुमति लेकर लाउडस्पीकर के प्रयोग को लेकर विभिन्न धर्मस्थलों की समितियां और संचालक सोच में हैं।
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दरअसल, हाइकोर्ट ने 15 जनवरी से धर्मस्थलों पर बिना अनुमति लाउडस्पीकर बजाने पर पाबंदी लगा दी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि बिना अनुमति के लिए धर्म स्थलों के साथ निजी कार्यक्रमों में भी लाउडस्पीकर नहीं बज सकेगा। कोर्ट के निर्देश के बाद धर्मगुरू और धर्मस्थलों के संचालक सोच में पड़ गए हैं। धर्मगुरू जहां कोर्ट के फैसले का स्वागत कर रहे हैं। वहीं उन्होंने दबी जुबान से आदेश को लेकर संशयग्रस्त नजर आ रहे हैं।

कहते हैं धर्मगुरू
कोर्ट का आदेश सर्वोपरि है। मगर इसमें थोड़ा सा बदलाव जरूरी है। मंदिरों और धर्मस्थलों को आदेश के दायरे बाहर रखा जाना चाहिए। डीजे और निजी कार्र्यक्रमों में लाउडस्पीकर का बैन का आदेश सही है।
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संजीव दीक्षित, महंत काली मंदिर ठंडी सड़क

अजान हर वक्त नहीं होती है। कोर्ट के आदेश का इस्तकबाल करते हैं, मगर मस्जिदों में शौकिया तौर पर लाउडस्पीकर नहीं बजते हैं। इसके लिए कोर्ट को कुछ रियायत देने की जरूरत है।
बदूद मियां, शहर काजी

बिना अनुमति लाउडस्पीकर बजाने पर पाबंदी का आदेश सही है। इससे ध्वनि प्रदूषण कम होगा। मगर त्योहारों के मौके पर अनुमति मिलने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
फादर नथैनियल दास, पादरी मैकगॉ चर्च

कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। धार्मिक स्थलों पर बजने वाले लाउडस्पीकर की आवाज इतनी होनी चाहिए कि दूसरा कोई प्रभावित नहीं हो। त्योहार पर अनुमति के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए।
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भाई लोकेंद्र सिंह, ज्ञानीजी, गुरूद्वारा ठंडी सड़क
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